मुख्यपृष्ठनए समाचारएफडीए की छापेमारी के बाद रोजाना दूध संग्रह ७.५१ लाख लीटर घटा

एफडीए की छापेमारी के बाद रोजाना दूध संग्रह ७.५१ लाख लीटर घटा

मिलावट के बड़े खेल की आशंका

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में मिलावटी दूध के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई शुरू होते ही प्रतिदिन दूध संग्रह में ७.५१ लाख लीटर की गिरावट दर्ज की गई है। डेयरी विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मई २०२६ में रोजाना औसतन १.७९२३ करोड़ लीटर दूध खरीदा जा रहा था, जो जून में घटकर १.७१७२ करोड़ लीटर रह गया। जनवरी की तुलना में गिरावट करीब १८ लाख लीटर प्रतिदिन है।
अधिकारियों का मानना है कि अचानक आई यह कमी संकेत देती है कि बाजार में बड़ी मात्रा में नकली या मिलावटी दूध खपाया जा रहा था। पिछले दो महीनों में एफडीए ने करीब ३६० प्रतिष्ठानों की जांच की, १.६० लाख लीटर से अधिक मिलावटी दूध जब्त किया, ३५ लाइसेंस निलंबित किए और सात एफआईआर दर्ज कराईं।
छापों में स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, शैंपू, दूषित पानी और यूरिया मिलाकर कृत्रिम दूध बनाने का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने खासकर असंगठित क्षेत्र के दूध संग्रह केंद्रों को निशाने पर लिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में दूध संग्रह १.३१ करोड़ से बढ़कर १.७१ करोड़ लीटर प्रतिदिन हो गया था।
मिलावट का काला कारोबार बेनकाब
एफडीए की जांच में स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, शैंपू, यूरिया और दूषित पानी मिलाकर कृत्रिम दूध तैयार किए जाने का खुलासा हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रसायनयुक्त दूध का सेवन लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
सवालों के घेरे में पुराना रिकॉर्ड
सरकारी आंकड़ों में पिछले तीन वर्षों में दूध संग्रह तेजी से बढ़ता दिखा, लेकिन एफडीए की कार्रवाई के बाद अचानक आई भारी गिरावट ने संदेह बढ़ा दिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि पहले बढ़ा उत्पादन असली दूध का था या मिलावट के कारोबार का।

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