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छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लो… युवाओं को परेशान किया तो छोड़ेंगे नहीं!.. आदित्य ठाकरे की सरकार को चेतावनी

सामना संवाददाता / मुंबई

नीट पेपर लीक के विरोध में आंदोलन करनेवाले छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने में टाल-मटोल किए जाने को लेकर शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन अपना वादा पूरा करने के बजाय छात्रों को परेशान किया जा रहा है। सोशल मीडिया से रील्स हटाने के लिए उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे और नोटिस वापस लें, अन्यथा उन्हें परेशान किया गया तो सरकार को बख्शा नहीं जाएगा, ऐसी चेतावनी आदित्य ठाकरे ने दी।
पुलिस से मिली नोटिस को छात्र शिवसेना के मेल पर भेजें
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने ‘मातोश्री’ निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्प्रâेंस में कहा कि २२ और २३ जुलाई के आंदोलनों के दौरान कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गर्इं। कई छात्रों को हिरासत में रखा गया। इनमें कुछ नाबालिग छात्र भी शामिल हैं। चेंबूर, आरसीएफ, भोईवाड़ा और वरली पुलिस थानों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी एफआईआर रद्द की जाएं और नोटिस वापस लिए जाएं, यह शिवसेना की स्पष्ट मांग है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो छात्र अपने नोटिस shivsenaubtlegal@gmail  पर भेजें। अपने वादे के मुताबिक, शिवसेना उनके मुकदमे नि:शुल्क लड़ेगी, कई वकीलों ने भी छात्रों के मामलों को नि:शुल्क लड़ने की घोषणा की है। अन्य वकील भी इस लड़ाई में शामिल होना चाहते हैं तो वे आगे आ सकते हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि १९ जुलाई के आंदोलन के आयोजकों और युवाओं के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उन मामलों की जिम्मेदारी शिवसेना लेगी। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान सरकार ने रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस के माध्यम से पैलेट गन, एके-४७, बिजली के झटके और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया। सरकार को युवाओं के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। इसके बजाय कल्याण-डोंबिवली में डॉक्टरों पर हमला करनेवाले नगरसेवक रमेश म्हात्रे को जमानत कैसे मिले, इसकी सरकार को ज्यादा चिंता है।
सरकार क्यों इतना डर गई है?
छात्रों द्वारा बनाई गई रील्स को सरकार नोटिस भेजकर हटवा रही है। उनके इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। यह सरकार आखिर किससे डर रही है? क्या सरकार छात्रों से डर रही है? आपके मन में इतनी दहशत क्यों है? ऐसा सीधा सवाल करते हुए आदित्य ठाकरे ने सरकार को घेरा। कहा अब इस तानाशाह से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस को युवा छात्रों का करियर बर्बाद नहीं करना चाहिए और सरकार के एजेंट बनकर काम नहीं करना चाहिए।
मुख्यमंत्री भी सीईटी घोटाले में शामिल है?
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि सीईटी एक स्वायत्त संस्था है। नीट परीक्षा आयोजित करनेवाली एनटीए के मामले में भी यही तर्क दिया गया था। तो क्या मुख्यमंत्री इस घोटाले में शामिल हैं? क्या मुख्यमंत्री लाखों छात्रों का करियर बर्बाद करने जा रहे हैं? या फिर वे सीईटी में संदिग्ध तरीके से पर्सेंटाइल हासिल करने वाले भाजपा नेताओं के बच्चों का पक्ष ले रहे हैं? उन्होंने कहा कि सीईटी पेपर घोटाले के कारण भाजपा नेताओं के बच्चे टॉपर बन रहे हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सीईटी घोटाले पर स्पष्टीकरण देने से बच रहे हैं।
लाठीचार्ज किसने करवाया?..दिल्ली से आदेश आया था या मुख्यमंत्री ने दिया था?
आदित्य ठाकरे ने सरकार से सवाल किया कि छात्रों के आंदोलन पर लाठीचार्ज और कार्रवाई का आदेश किसने दिया। क्या इसके लिए दिल्ली से निर्देश आए थे? आदित्य ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि जिन छात्रों ने एक तानाशाह को झुकने पर मजबूर कर दिया, अब सरकार उन्हीं के सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने पर उतर आई है।

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