मुख्यपृष्ठधर्म विशेषवाराणसी में विराजे पंचमहादेव

वाराणसी में विराजे पंचमहादेव

भोलेनाथ की नगरी काशी सावन में शिवभक्तों के हर हर महादेव के नारे से गूंजायमान है। देश की इस धार्मिक राजधानी के बारे में मान्यता यह है कि भगवान शंकर यहां खुद विराजते हैं। शास्त्रों के अनुसार ये भगवान शंकर की त्रिशूल पर टिका हुआ है। इसे दुनिया का सबसे प्राचीन शहर माना जाता है। कहते हैं, जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा हो, महादेव के दर्शन मात्र से वो सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। देवों के देव महादेव भक्तों के दुखों के साथ काल को भी हर लेते हैं और उन्हें मोक्ष का वरदान देते हैं।
तिल भांडेश्वर
काशी के केदार खंड में बाबा तिल भांडेश्वर का मंदिर स्थित है। किवदंतियों के मुताबिक भगवान शिव का ये लिंग मकर संक्रांति के दिन एक तिल के आकार में बढ़ता है। इसकी वर्णन शिव पुराण धर्म ग्रंथ मे भी मिलता है। वर्तमान में इस लिंग का आधार कहां है, इसका पता आज तक नहीं लग पाया। अति प्राचीन ये शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर का निर्माण सैकड़ों वर्ष पहले हुआ था।
मारकण्डेय महादेव
वाराणसी गाजीपुर मार्ग पर कैथी के पास मारकण्डेय महादेव का मंदिर है। इनका वर्णन मारकण्डेय पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। इसी स्थान पर १२ वर्ष की उम्र में मारकण्डेयजी ने सृष्टि के पालनहार भोले शंकर के दर्शन किए थे और यम यानी मृत्यु पर जय प्राप्त की थी।
गौरी केदारेश्वर मंदिर
कहा जाता है की काशी में प्राण त्यागने से मुक्ति मिलती है। यही नहीं, काशी के केदार खंड में विद्यमान केदार मंदिर में दर्शन करने से इंसान अपने प्राण कहीं त्यागे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पं. पवन त्रिपाठी बताते हैं कि केदारेश्वर यानि जिनके मस्तक पर मां गंगा विराजती हैं। केदार खंड में शरीर त्यागने से पहले किसी भी तरीके की पीड़ा नही होती और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मृत्युंजय महादेव मंदिर
काशी के मैदागिन क्षेत्र में भोलेनाथ मृत्युंजय महादेव के रूप में विराजते हैं। इनके दर्शन मात्र से ही मन की हर कामना पूरी हो जाती है। चाहे ग्रहों की बाधा हो या फिर कुछ और, मृत्युंजय महादेव के मंदिर में दर्शन कर सवा लाख मृत्युंजय महामंत्र के जाप से सारे कष्टों का निवारण हो जाता है। मान्यता है कि यदि कोई भक्त लगातार ४० सोमवार यहां हाजिरी लगाए और त्रिलोचन के इस रूप को माला फूल के साथ दूध और जल चढाएं तो उसके जीवन के कष्टों का निवारण हो जाता है।
जगेश्वर महादेव
मैदागिन मार्ग से आगे बढ़ने पर महादेव का दिव्य मंदिर है। शिव की नगरी काशी में तो कण-कण में शिव का वास है। वह यहां के आराध्य हैं और लोगो की रक्षा और भरण पोषण करते हैं। शिव के इस आनंद वन में उनके चमत्कारों की कोई कमी नही है। इस मंदिर में भगवान शिव का लिंग हर शिवरात्रि को जौ के एक दाने के बराबर बढ़ जाता है। मंदिर के आस-पास ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्होंने इस शिव लिंग को अपने बचपन से बढ़ते हुए देखा है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से इस जन्म का ही नही बल्कि सात जन्मों का पाप कट जाता है।

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