-८० चालकों के खिलाफ एक्शन पर गैर कानूनी रूप से चल रहे हजारों रिक्शों का क्या?
सुरेश गोलानी
ठाणे जिला क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के फ्लाइंग स्क्वाड से जुड़े अधिकारियों ने ऑटो रिक्शा चालकों के मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की जांच हेतु अभियान चलाया जा रहा है। आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड के पुलिस निरीक्षक उमेश देवरे के अनुसार, इस अभियान के तहत कार्यवाही करते हुए पिछले दो दिनों में मीरा भायंदर के कुल ८० ऑटो रिक्शा चालकों को नोटिस जारी किया है, लेकिन सीधा सवाल यह है कि मराठी भाषा के ज्ञान न होने की वजह से आरटीओ अधिकारी सड़क पर उतरकर कार्यवाही में तो जुटे हैं, लेकिन शहर में अवैध रूप से धड़ल्ले से चल रहे हजारों ऑटो रिक्शों का क्या? ज्ञात हो कि शहर में चालकों द्वारा अन्य नियमों का उल्लंघन करने के अलावा हजारों की संख्या में अवैध ऑटो रिक्शा बिना वैध दस्तावेजों, बिना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) और बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रहे हैं। आरटीओ और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते इन पर किसी प्रकार की कारवाही न होने के कारण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए चालक अवैध रूप से सड़कों पर रिक्शा चला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई ऑटो-रिक्शा चालकों की संदिग्ध और आपराधिक पृष्ठभूमि होने की आशंका जताई जा रही है। इन अवैध गतिविधियों के कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ने के अलावा यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है। फ्लाइंग स्क्वाड के अनुसार भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की जांच के साथ-साथ इस अभियान में रिक्शा के दस्तावेजों को भी चेक किया जा रहा है।
भाषा सीखकर प्रमाण पत्र हासिल करने हेतु एक महीने का नोटिस
आरटीओ के अनुसार, मराठी नहीं बोल पाने वाले चालकों को महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, १९८९ से संबंधित अधिसूचना के तहत शुरुआत में एक महीने का (नोटिस) समय दिया जा रहा है ताकि वे भाषा सीखकर प्रमाण पत्र हासिल कर सकें। देवरे ने बताया कि अगर नियमों का पालन करने में ऑटो चालक विफल रहते हैं, तो उनका लाइसेंस और बैज तीन महीने के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाएगा। इसके साथ ही लगातार उल्लंघन करने पर परमिट रद्द भी हो सकता है। ज्ञात हो कि अभियान के तहत की जाने वाली कार्यवाही प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान पहले से ही अनिवार्य था। लेकिन १२ अगस्त को किए गए संबंधित कानूनी संशोधन के तहत इस प्रावधान को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। आरटीओ का दावा है कि इस दौरान प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से करीब १.६४ लाख चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान दिया जा चुका है।
