-साढ़े सात घंटे डटे तो दर्ज हुई पैलेट गन फायरिंग की एफआईआर
-गृह मंत्री और गृह सचिव को देना पड़ा आदेश
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पेलेट गन फायरिंग के मुद्दे पर शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पेलेट लगने से घायल छात्र साहिल लोचब को लेकर राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित पुलिस कार्यालय पहुंचे और एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ गए। करीब साढ़े सात घंटे के धरने के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस ने साहिल की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
एफआईआर की प्रति लेकर बाहर निकले राहुल गांधी ने इसे ‘न्याय की तरफ पहला कदम’ बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके धरने और दबाव के बाद गृह मंत्री अमित शाह और गृह सचिव को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना पड़ा। मामला २० जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। साहिल लोचब का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट फायरिंग में उनके शरीर में बड़ी संख्या में छर्रे लगे और उनकी एक आंख की रोशनी खतरे में पड़ गई। मीडिया रिपोर्टों में साहिल के शरीर में २०० से अधिक पेलेट लगने की बात सामने आई है।
अब असली सवाल- आदेश किसने दिया?
एफआईआर फिलहाल अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई है। इसलिए जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह होगा कि पेलेट गन इस्तेमाल करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, किस अधिकारी ने अनुमति दी और फायरिंग करनेवाले सुरक्षाकर्मी कौन थे। राहुल गांधी के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण है। वे घायल छात्र के साथ खुद थाने पहुंचे, घंटों धरने पर बैठे और एफआईआर दर्ज होने के बाद ही हटे। इससे कांग्रेस को सरकार के खिलाफ यह सवाल उठाने का मौका मिला है कि जिस शिकायत पर पुलिस को सामान्य प्रक्रिया में कार्रवाई करनी चाहिए थी, उसके लिए देश के नेता प्रतिपक्ष को सात घंटे से अधिक सड़क पर क्यों बैठना पड़ा? पेलेट से घायल छात्र की एफआईआर दर्ज हो गई है, लेकिन अब लड़ाई एफआईआर से आगे बढ़कर इस सवाल पर टिक गई है, ‘गोली चलाने का आदेश किसका था?’
`अमित शाह का डर बता रहा है कि उन्हें अपराध कबूल है!’
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर दिल्ली में सियासी पारा चढ़ गया है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए संसद मार्ग पुलिस थाने का रुख किया। राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि जब तक छात्रों के आंदोलन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। हालांकि, राहुल गांधी के धरने के बाद दिल्ली पुलिस झुक गई। और आखिरकार अंदोलन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
इससे पहले सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को एक पोस्ट टैग करते हुए उनपर तीखा हमला किया और कहा, `अमित शाह जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।’ राहुल गांधी इस दौरान कथित पैलेट गन हमले में घायल छात्र साहिल लोचब को भी अपने साथ लेकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि २० जुलाई को जंतर-मंतर पर पैलेट गन चली। साहिल के शरीर में २०० से ज्यादा छर्रे लगे। उनकी आंख में ३ छर्रे हैं। साहिल की आंख की रोशनी खतरे में है। १३ अगस्त से हम चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन शिकायत नहीं दर्ज हो रही है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने पैलेट गन नहीं चलाई। तो, बस एक ही सवाल है कि किसी ने तो ऐसा किया ही होगा, अपराध तो हुआ ही है, हम मांग कर रहे हैं कि एफआईआर दर्ज की जाए। इस देश में, अमित शाह का गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के लोग न्याय नहीं होने देंगे।’ इस दौरान प्रियंका गांधी और जयराम रमेश भी मौजूद रहे।
‘साहिल को न्याय दिलाकर रहूंगा’
राहुल गांधी ने शुक्रवार को साहिल के साथ एफआईआर दर्ज कराने संसद मार्ग के डीसीपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि २० जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफी मांगी।
