-प्रभाकर पवार लिखित ‘मुंबई पुलिस आयुक्तों का इतिहास’ पुस्तक का विमोचन
सामना संवाददाता / मुंबई
कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाठी-गोली चलाने की जरूरत नहीं होती। जनता के साथ संवाद स्थापित करके और ‘बैक डोर’ प्रबंधन के जरिए भी परिस्थितियों को संभाला जा सकता है। दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में पुलिस की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एम.एन. सिंह ने गुरुवार को यह बेबाक राय व्यक्त की।
वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर पवार द्वारा लिखित ‘मुंबई पुलिस आयुक्तों का इतिहास’ पुस्तक का शानदार विमोचन समारोह मुंबई पुलिस क्लब स्थित प्रेरणा सभागृह में आयोजित किया गया। इसी अवसर पर मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एम.एन. सिंह बोल रहे थे। पुलिस आयुक्तों की नियुक्तियों में सरकार के हस्तक्षेप पर भी सिंह ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए पेशेवर स्वतंत्रता और प्रशासनिक क्षमता बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर मुंबई के पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने प्रभाकर पवार की पुस्तक की सराहना करते हुए मुंबई पुलिस बल की सामूहिक कार्यक्षमता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस की उपलब्धियां किसी एक पुलिस आयुक्त या वरिष्ठ अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरे पुलिस बल के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं।
‘यह पुलिस आयुक्तों की गोपनीय रिपोर्ट जैसा दस्तावेज’
एम.एन. सिंह ने प्रभाकर पवार की लेखन यात्रा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक पुलिस बल और अपराध जगत पर ११ पुस्तकें लिखी हैं, यह गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि मैंने उत्सुकतावश पवार की नई पुस्तक पढ़ी है और यह पुस्तक पुलिस आयुक्तों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) जैसी है। प्रभाकर पवार ने पुस्तक के निर्माण में सहयोग करनेवाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संजय व्हनमाने ने किया।
क्रांति लाने की ताकत छपे हुए शब्दों में ही है -संजय राऊत
शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने मुंबई पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि मुंबई ने कई तरह के अपराध देखे हैं और उन अपराधों को उतनी ही मजबूती से कुचलने वाले पुलिस आयुक्त भी देखे हैं। पुलिसकर्मी शहर, राज्य और देश के लिए अपना बलिदान देते हैं, इसलिए जनता सुरक्षित रहती है। संजय राऊत ने कहा कि राजनेताओं को पुलिस के इस योगदान का सम्मान करना चाहिए। पुलिस का मनोबल गिराया गया तो राज्य की कानून व्यवस्था टिक नहीं पाएगी। उन्होंने आगे कहा कि देश में क्रांति लाने की वास्तविक ताकत छपे हुए शब्दों में ही है।
