सामना संवाददाता / मुंबई
नीट पेपर लीक के खिलाफ अमेरिका से भारत लौटकर बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा करनेवाले अभिजीत दीपके अब जिलों की बदहाल सरकारी स्कूल व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर के छात्रों को एकजुट करनेवाले दीपके के आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला था। लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इसे मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया।
छत्रपति संभाजीनगर में हुई एक बैठक के दौरान दीपके ने साफ किया था कि फिलहाल उनका राजनीति में प्रवेश करने का कोई इरादा नहीं है। उनका कहना था कि विद्यार्थियों के सवालों को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। इसी क्रम में उन्होंने अब अपना रुख जिला परिषद स्कूलों की ओर कर लिया है। दीपके ने हाल ही में हिंगोली जिले के एक जिला परिषद स्कूल का दौरा किया और वहां की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने स्कूल के मुख्याध्यापक के तबादले की मांग की थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि मुख्याध्यापक का तबादला नहीं किया गया तो वे उपवास आंदोलन करेंगे। इसके बाद अब दीपके ने जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर भी तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जितने भी मंत्री, विधायक और सांसद हैं, उन्हें अपने बच्चों को एक दिन खराब और गड्ढों से भरी सड़कों पर पैदल स्कूल भेजना चाहिए। तभी उन्हें समझ आएगा कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के विद्यार्थी किन मुश्किलों से स्कूल पहुंचते हैं।
जर्जर स्कूलों के लिए सरकार जिम्मेदार, तुरंत दें इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करनेवाले सीजेपी के अभिजीत दीपके ने अब महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाली के लिए महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के लिए दादा भुसे को जिम्मेदार ठहराया है।
