-विदेश नीति ने लगाई ‘हाउडी’ और ‘नमस्ते’ की वाट
-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जब भी हमारी विदेश नीति का डंका बजता है, तो लगता है मानो पूरा ग्लोब ही हिंदुस्थान की उंगलियों पर घूम रहा है। पर अचानक वॉशिंगटन से खबर आती है कि अमरीका में हिंदुस्थान की फैन-फॉलोइंग पहली बार ५० प्रतिशत से नीचे खिसक गई है। यानी कभी जिनके साथ हम ‘हाउडी’ और ‘नमस्ते’ खेल रहे थे, आज वही अमरीकन हमारे प्रति ठंडे पड़ चुके हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के कूटनीतिक प्रभाव और वैश्विक छवि को लेकर अमरीका के प्रतिष्ठित प्यू रिसर्च सेंटर का हालिया सर्वेक्षण बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक रुझान सामने लाया है। प्यू रिसर्च के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमरीका में भारत की लोकप्रियता पहली बार गिरकर ५० प्रतिशत से नीचे आ गई है। यह आंकड़ा न केवल दोनों देशों के बीच बदलते रणनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है, बल्कि अमरीकी जनता के बीच भारत को लेकर बढ़ रही नकारात्मक और विरोधी राय को भी उजागर करता है।
सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु और आंकड़े
ऐतिहासिक गिरावट: अमरीका में पिछले कुछ दशकों से भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखा जा रहा था। यह पहला मौका है जब सर्वेक्षण में भारत को पसंद करने वाले अमरीकियों की संख्या आधी आबादी से भी कम दर्ज की गई है।
विरोधी राय में वृद्धि: भारत के प्रति नकारात्मक या अनुकूल राय न रखने वालों का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। अमरीका में एक बड़ा वर्ग अब भारत के प्रति तटस्थ या फिर आलोचनात्मक रुख अपना रहा है।
राजनीतिक विचारधारा का असर: सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अमरीका में राजनीतिक दलीय निष्ठा (डेमोक्रेटिक बनाम रिपब्लिकन) के आधार पर भी भारत को लेकर दृष्टिकोण में भिन्नता आई है। मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीति को लेकर अमरीकी जनता की धारणा में बदलाव आया है।
कूटनीतिक निहितार्थ
भारत और अमरीका के संबंध वर्तमान में रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्वाड जैसे रणनीतिक मंचों पर मजबूत बने हुए हैं। हालांकि, किसी भी देश के साथ दीर्घकालिक साझेदारी केवल सरकारों के स्तर पर नहीं, बल्कि ‘पीपल-टू-पीपल’ यानी जनता के स्तर पर बने संबंधों पर टिकी होती है।
गिरावट के प्रमुख कारण
विदेश नीति और भू-राजनीतिक रुख: रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत का निष्पक्ष और व्यापारिक रुख, अमरीका के आम नागरिकों और नीति-निर्माताओं के एक वर्ग को रास नहीं आया है। पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत के इस रुख की अक्सर आलोचना की गई है।
लोकतांत्रिक और सामाजिक मुद्दे: अमरीकी मीडिया और थिंक-टैंकों में भारत में मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और घरेलू राजनीति को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं ने अमरीकी जनमानस को प्रभावित किया है।
आर्थिक व तकनीकी प्रतिस्पर्धा: व्यापारिक नीतियों, टैरिफ विवादों और अमरीका में स्थानीय रोजगार बनाम एच-१बी वीजा जैसे मुद्दों पर भी अमरीकी जनता में भारत के प्रति कुछ हद तक संशय बढ़ा है।
