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चीनी ने मुंह कड़वा किया, प्याज निकाल रहा आंसू

-त्योहारों से पहले रसोई पर महंगाई का डबल अटैक…प्याज एक महीने में ७६ प्रतिशत तक उछला, चीनी ५५ रुपये पार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी की रसोई पर महंगाई ने दो तरफ से हमला बोल दिया है। एक तरफ चीनी लगातार महंगी हो रही है तो दूसरी तरफ प्याज के भाव तेजी से चढ़ रहे हैं। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इन दोनों वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने केंद्र सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा भाव २० जुलाई २०२६ को ४८.१८ रुपये प्रति किलो था, जो २० अगस्त को बढ़कर ५५.७० रुपये प्रति किलो पहुंच गया। दूसरी ओर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि एक महीने में प्याज के दाम कुछ बाजारों में ७६ प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और कई राज्यों में थोक भाव दोगुने हो चुके हैं।
इथेनाल के कारण बढ़ी चीनी की महंगाई
सरकार प्याज की महंगाई के पीछे कम उत्पादन, मानसून में देरी और महाराष्ट्र समेत प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीफ फसल को हुए नुकसान को कारण बता रही है। आपूर्ति बढ़ाने के लिए नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए प्याज पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
चीनी के मामले में सरकार ने एक मिलियन टन कच्ची चीनी के अस्थायी आयात सहित कई कदम उठाए हैं। केंद्र का कहना है कि उत्पादन में कमी का कारण गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर रोग तथा अधिक बारिश से जलभराव है। सरकार ने यह भी खारिज किया है कि मौजूदा महंगाई का मुख्य कारण एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन है।
लेकिन आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि जब मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान करीब ३४३ लाख टन से घटकर लगभग ३०६ लाख टन रह गया, तो निर्यात, एथेनॉल और घरेलू खपत के बीच संतुलन पहले क्यों नहीं बनाया गया? दिल्ली सरकार को भी मंगलवार को आपात कदम उठाने पड़े। उसने नाफेड से प्याज खरीदकर सस्ता बेचने, चीनी ३५ रुपये किलो उपलब्ध कराने और जमाखोरी के खिलाफ छापेमारी की घोषणा की।
राजनीतिक इतिहास बताता है कि प्याज सिर्फ सब्जी नहीं, सरकारों का तापमान नापने वाला थर्मामीटर भी रहा है। अब उसके साथ चीनी भी जुड़ गई है। त्योहार सिर पर हैं, चुनाव आगे हैं और रसोई का बजट पहले ही बिगड़ चुका है। पहले कहा गया था अच्छे दिन आएंगे। अब रसोई पूछ रही है कि चीनी मीठी कब होगी और प्याज काटने से पहले ही आंखों में आंसू क्यों आ रहे हैं।

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