-डाॅ. रवीन्द्र कुमार
लो जी ‘क्राइम पेट्रोल’ में इसी बात की कमी रह गयी थी। लेटेस्ट ये है कि जब प्रेमी को पता चला कि उसकी प्रेमिका के घरवाले प्रेमिका की शादी प्रेमी से कराने को राज़ी नहीं है तो उसे बहुत दुख हुआ। वो गाना है ना
“तुम अगर मुझको न चाहो _तो कोई बात नहीं!
किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी”
बस कुछ इसी तर्ज़ पर जब पागल-प्रेमी महोदय को पता चला कि न केवल प्रेमिका के घरवाले प्रेमिका की शादी प्रेमी से यानि उससे करने को तैयार नहीं बल्कि वो उसकी शादी कहीं और करने की जुगाड़ में है। यह जान पागल प्रेमी और ज्यादा पागल हो गया। फिर उसे पता चला कि इस प्रस्तावित शादी का बिचौलिया बोलो, मध्यस्थ बोलो, विचोला बोलो, मिडल मैन बोलो घोटक बोलो या फिर ईडानीलअकरन बोलो वह कोई और नहीं बल्कि उसका दोस्त ही है। बस ये सुनना था कि हीरो हीरालाल का पागलपन चरम पर पहुँच गया।
“दोस्त! दोस्त न रहा” कि तर्ज़ पर उसने एक दारू पार्टी अपने इस विचोले दोस्त के ऑनर में घोषित कर दी। इसी पार्टी में हीरो ने उस बेचारे बिचोलियो को गोली मार दी। अब ऐसा भी कोई करता है। जिसे देखो वो ‘साइको-किलर’ ही बना जा रहा है। जितना प्यार, उस से दस गुना ‘हेट’ समाज में चल रेली है। अब इस घटना से दूसरे बिचोलियों में ‘पैनिक’ फैलना ही था। पहले ही समाज में इस जमात का बहुत टोटा चल रहा है। ये तो बेचारे पहले के ही चले आ रहे हैं जिन्हें समाज का, उसके रीतिरिवाज का, आपके लाड़ले और बिटिया का ख्याल हुआ करता था। वे पूरी सूची की सूची रखते थे। किसका लड़का क्या कर रहा है? किसकी लड़की सयानी हो रही है? अब तो जहां देखो विज्ञापन की बहार है। पाणिग्रहण के लिए विज्ञापन ‘पान-बहार’ की तरह दिये जाने लगे हैं। सबसे बड़ी बात सच-झूठ का पता लगाने का कोई मकेनिज़्म नहीं है। अभी तक एक ट्राइंगल बना हुआ था -पति-पत्नी और वो। अब इस ट्राइंगल में एक कोण बिचोलिए का भी आन जुड़ा। दूसरे शब्दों में अब ये ट्राइंगल नहीं रह गया है बल्कि स्क्वाॅयर बोलो, रेक्टेंगल बोलो हो गया है। 180 डिग्री से सीधे 360 डिग्री।
बिचोलियो! अब तुम्हारी खैर नहीं। कुछ तो अभी से अपने लिए ज़ेड-प्लस सिक्युरिटी रख लेंगे या फिर बंदूक के लाइसेन्स के लिए आवेदन देने लग पड़ेंगे। यह पहली बार होगा कि अब प्रेमी/प्रेमिका, पति,पत्नी के मिडल में मिडलमैन भी आ गया है। वो कहावत है न ‘दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय’। बहुत तुमने झूठी सच्ची कहानियाँ सुना ली। अब ये खूनी कहानी है। पहले ही बिचोलियों की कमी है। जो हैं वो भी लगभग बेरोजगार बैठे हैं। कारण ली।लिव-इन में कोई बिचोलिया दरकार नहीं है। ये तो दो कबाबों का मिलन है इसमें हड्डी नहीं मांगता। उस पर तुर्रा ये कि अब जान के लाले भी पड़ने लग जाएँगे। बेचारे ऐसे तो वे ‘एक्सटिंक्ट’ हो जाएंगे। मिडल-मैन हमारे समाज का अभिन्न अंग है। हमें उनकी ज़रूरत है। उन्हें ऐसे न मारो। एक मिडल-मैन के मर्डर का मतलब है न जाने कितनी ही प्रस्तावित मैरिज की हत्या। जीव हत्या पाप होती है।
सास-ससुर-फूफा हाजिर हैं
सज़ा पाने को
कोई गोली से ना मारे
मेरे ‘बिचोलिए’ को
