-मनपा पर कब्जे के बाद महायुति में महापौर की कुर्सी का खेल; पहले भाजपा, फिर शिंदे सेना?
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका पर भगवा झंडा फहराने के बाद महायुति के भीतर अब सत्ता की असली खींचतान शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। मुंबई के महापौर पद को लेकर भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ के सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले की चर्चा ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने २८ अगस्त को दावा किया कि पांच साल के कार्यकाल में शिंदे गुट को भी ढाई साल महापौर पद मिलेगा। यानी मुंबई की जनता ने पांच साल के लिए नगरसेवकों को चुना, लेकिन महापौर की कुर्सी का हिसाब पहले ही ‘ढाई साल इधर, ढाई साल उधर’ तय करने की कवायद शुरू हो गई है। सवाल यही है कि मुंबई की सत्ता जनता के लिए है या महायुति के भीतर सत्ता-संतुलन साधने के लिए।
पहले भाजपा, फिर शिंदे गुट का दावा?
मनपा चुनाव के बाद महायुति के भीतर भाजपा और शिंदे गुट के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर चर्चा पहले भी सामने आती रही है। अब शिंदे के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा फिर सतह पर आ गया है। शिंदे गुट की ओर से दावा किया जा रहा है कि भाजपा के कार्यकाल के बाद महापौर पद शिंदे गुट को मिलना है।
