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सीयूएसबी की पीएचडी शोधार्थी प्रियंका कुमारी ने दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित आरक्यू 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया शोधपत्र

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश के गया जी जिले के नेशनल हाईवे-120 पर पंचानपुर के पास स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भौतिकी विभाग की पीएचडी शोधार्थी प्रियंका कुमारी ने दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित आरक्यू 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। सुश्री प्रियंका कुमारी डॉ. रोहित रंजन शाही के निर्देशन में शोध कार्य कर रही हैं।
आरक्यू 2026 में उनकी यात्रा एवं सहभागिता को दक्षिण कोरिया स्थित सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित बीके 21 फोर प्रोजेक्ट फॉर क्रिएटिव ग्लोबल लीडर्स के अंतर्गत सहयोग प्रदान किया गया। सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा, भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. बुधेंद्र कुमार सिंह सहित विभाग के अन्य प्राध्यापकों ने सुश्री प्रियंका कुमारी एवं उनके शोध निर्देशक डॉ. रोहित रंजन शाही को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
इस संबंध में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्व के विभिन्न हिस्सों से शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में उन्नत पदार्थ विज्ञान एवं इससे संबंधित क्षेत्रों में नवीनतम प्रगति तथा उभरते शोध विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. रोहित रंजन शाही ने बताया कि सुश्री प्रियंका ने सम्मेलन में सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए मौखिक शोध प्रस्तुति दी तथा एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की। उन्होंने “एनीलिंग से प्रेरित चुंबकीय गुण और हाई एंट्रॉपी एलॉय की भविष्य की दिशाएं” शीर्षक से अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में हाई एंट्रॉपी एलॉय के चुंबकीय गुणों पर एनीलिंग के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया तथा इसके यांत्रिक व्यवहार एवं संरचना-गुणधर्म संबंधों को समझने की दिशा में भविष्य के शोध की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
शोधपत्र प्रस्तुत करने के अतिरिक्त प्रियंका को सम्मेलन में एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करने का अवसर भी मिला। डॉ. शाही ने बताया कि वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता एक महत्वपूर्ण अकादमिक दायित्व है, जिसमें शोध प्रस्तुतियों का समन्वय, समय प्रबंधन तथा विभिन्न संस्थानों से आए शोधकर्ताओं के साथ संवाद शामिल होता है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस भूमिका के लिए उनका चयन शोध समुदाय में उनकी सक्रिय सहभागिता तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके बढ़ते अकादमिक अनुभव को दर्शाता है।

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