मुख्यपृष्ठनए समाचार‘सर तन से जुदा’ धार्मिक नारा नहीं...संप्रभुता को चुनौती : हाई कोर्ट

‘सर तन से जुदा’ धार्मिक नारा नहीं…संप्रभुता को चुनौती : हाई कोर्ट

-तौकीर रजा की जमानत खारिज; कानपुर में बीबीए
-छात्रा ने लगाया धर्म परिवर्तन के दबाव का आरोप

लखनऊ / प्रयागराज

उत्तर प्रदेश में धर्म के नाम पर धमकी, हिंसक नारेबाजी और कथित धर्मांतरण के दबाव से जुड़े दो मामलों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज करते हुए ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे पर बेहद कड़ी टिप्पणी की है, वहीं दूसरी ओर कानपुर में बीबीए की एक छात्रा ने हाफिज और एक महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसा नारा कानून के शासन और भारत की संप्रभुता-अखंडता को चुनौती देता है। अदालत ने साफ किया कि इसकी तुलना ‘अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’, ‘हर-हर महादेव’ या ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ जैसे धार्मिक उद्घोषों से नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट ने बरेली में सितंबर २०२५ में हुई हिंसा से जुड़े मामले में तौकीर रजा को जमानत देने से इनकार कर दिया।
आतंक के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त…जयपुर ब्लास्ट के दो दोषियों को राहत से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष २००८ के जयपुर सिलसिलेवार बम धमाका मामले में उम्रवैâद की सजा काट रहे आतंकवादी मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ ढिल्ला पप्पू और शाहबाज अहमद की रिहाई की याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने दो टूक कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है, जिसे सामान्य जमानत अर्जी की तरह नहीं देखा जा सकता।

म्यांमार टेरर ट्रेनिंग कैंप केस
एनआईए ने अप्रैल २०२६ में एनआईए द्वारा दर्ज एक केस में ६ यूक्रेनियन और एक यूएस नागरिक के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट फाइल की। ​​एजेंसी ने यूएपीए के तहत केस रजिस्टर किया था। हालांकि, इस चार्जशीट में यूएपीए से जुड़ा सेक्शन नहीं लगाया गया है। इस बारे में जांच चल रही है। अगर यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता है तो एनआईए सप्लीमेंट्री चार्ज फाइल कर सकती है। एनआईए ने फॉरेनर्स एक्ट के सेक्शन २१ और २३ लगाए हैं, जो कंपाउंडेबल हैं। कोर्ट ने चार्जशीट पर १ अक्टूबर को विचार के लिए लिस्ट किया है।

अन्य समाचार