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सांसद, विधायक और नगरसेवक टूटने का इंतजार करनेवालों को पेपर लीक की चिंता नहीं!.. उद्धव ठाकरे का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने गणेशोत्सव में डीजे पर प्रतिबंध को लेकर जारी विवाद के बीच महायुति सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों को सहभागी बनाने के उद्देश्य से त्योहारों को आंदोलन का स्वरूप दिया था। आंदोलन का रूपांतरण उत्सव में हुआ, लेकिन उत्सव का रूपांतरण शोरगुल और हंगामे में नहीं होना चाहिए। उत्सव जनता की खुशी के लिए होना चाहिए, किसी को परेशानी देने के लिए नहीं।
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि डीजे को लेकर सरकार गणेशोत्सव मंडलों से चर्चा क्यों नहीं करती? उद्धव ठाकरे ने कल शिवसेना भवन में पत्रकार परिषद आयोजित कर इस मुद्दे पर मीडिया से संवाद किया।
सभी आयुक्तों की बैठक बुलाकर डीजे पर एक समान निर्णय लें
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने डीजे प्रतिबंध को लेकर शिवसेना की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले गणपति मूर्ति विसर्जन के दौरान ‘रोंबा-सोंबा’ जैसे भद्दे प्रकार शुरू हुए थे, लेकिन बाद में जनता ने ही उन्हें बंद कर दिया। जुलूस में केवल कानफोड़ू शोर करने के बजाय मंदिरों में होने वाली पारंपरिक आरती, झांझ और घंटियों की आवाज अधिक आनंददायक होती है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में गणेशोत्सव से पहले सभी गणेशोत्सव मंडलों के साथ चर्चा की गई थी। चर्चा करने से कोई भी विषय चरम पर नहीं पहुंचता। उस समय डेंगू और मलेरिया का प्रकोप था। सरकार के आह्वान के बाद कई गणेश मंडलों ने अपने मंडपों के दृश्यों के माध्यम से इस विषय को उठाकर जनजागृति की थी। उन्होंने इसकी याद दिलाते हुए कहा कि इस समाज में हर व्यक्ति का घर है। इसलिए डीजे प्रतिबंध को लेकर विद्यानंद बापट या अन्य लोगों से चर्चा करने से पहले गणेशोत्सव मंडलों की राय भी पूछी जानी चाहिए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही गृह विभाग है। नागपुर, पुणे, पनवेल जैसे अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग निर्णय लेने के बजाय डीजे प्रतिबंध का अधिकार जिन आयुक्तों के अधीन आता है, उन सभी आयुक्तों की बैठक बुलाकर इस विषय पर एक समान निर्णय लिया जाना चाहिए।
एमपीएससी पेपर लीक को लेकर सरकार पर जोरदार हमला
एमपीएससी पेपर लीक की घटनाओं को लेकर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमपीएससी के विद्यार्थियों के आंदोलन को शिवसेना का पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि नीट मामले में केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा लिया गया, अब एमपीएससी की गड़बड़ी के लिए आखिर किसका इस्तीफा लिया जाना चाहिए? क्या एक इस्तीफा होने के बाद ही अगली बार कोई सबक सीखेगा? केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ ही परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारियों को केवल ‘खोकों’ से मतलब है। विधायक, सांसद और नगरसेवक टूटेंगे या नहीं, वे केवल इसी पर नजर रख रहे हैं। पेपर लीक की ओर उनका ध्यान ही नहीं है, क्योंकि मौजूदा सत्ताधारियों को सरकार चलाना ही नहीं आता।
विधायक टूटने पर सूरत-गुवाहाटी जाते हैं, पेपर लीक होने पर विद्यार्थी कहां जाएंगे?
‘जब विधायक टूटते हैं तो सूरत और गुवाहाटी चले जाते हैं, फिर पेपर लीक होने पर हम कहां जाएं?’ यह सवाल कोल्हापुर के युवा विवेकानंद ने उठाया था। उसकी सराहना करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘कहां जाएं’ का मतलब है कि न्याय की गुहार आखिर कहां लगाएं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो खुद ही टूट गए हैं, उन्हें पेपर लीक से क्या लेना-देना? ऐसी टूटी हुई मानसिकता वाले लोग सरकार कैसे चलाएंगे?
फैसला आने में देरी तो दुरुपयोग रोकने के लिए धनुष-बाण चुनाव चिह्न फ्रीज किया जाए
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना से संबंधित मामले की सुनवाई को लेकर भी उद्धव ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने धनुष-बाण चुनाव चिह्न को प्रâीज करने की मांग की है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना पार्टी और उसका चुनाव चिह्न हमें मिलना चाहिए, इसी मांग को लेकर यह न्यायिक लड़ाई जारी है। लेकिन जब तक फैसला नहीं आता, तब तक उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए चुनाव चिह्न को प्रâीज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चार वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान दो बड़े चुनाव हो चुके हैं। मनपा के चुनाव हो चुके हैं और कई जिला परिषदों के चुनाव भी हो चुके हैं। मनमाना शासन चल रहा है और अदालत में लगातार ‘तारीख पर तारीख’ का सिलसिला जारी है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना का चोरी हुआ सामान चोर सहित पकड़ा जा चुका है। इसलिए जब तक मामले का फैसला नहीं होता, तब तक चोरी किए गए चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए।

`उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि गुजरात में छह पार्टियां फर्जी पाई गई हैं, जिनकी संपत्ति ६२० करोड़ रुपए की है। इन पार्टियों के कार्यालय अमदाबाद के नारोडा इलाके में हैं। इतनी संपत्ति जमा करने वाले राजनीतिक दलों का संविधान चुनाव आयोग देखता है या नहीं? या फिर यह कहा जाए कि इस चंदे में चुनाव आयोग भी भागीदार है? आखिर यह सब क्या चल रहा है? इस तरह उद्धव ठाकरे ने अपना रोष व्यक्त किया।’

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