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एचएम के बाद पीएम ने किया भाजपा कार्यालय का उद्घाटन…पार्टी के लिए ‘नमो कमलम’, छात्रों के लिए मौत का हॉस्टल?

-७६८ भाजपा कार्यालयों का लक्ष्य, दो साल पहले ही ५६३ तैयार; उधर छात्रों के सिर पर सुरक्षित छत तक नहीं
-गोवा में ‘अटल भवन’ के बाद नवसारी में एआई वाला दफ्तर, जेन-जी पूछ रहा-हमारे हॉस्टलों की बारी कब?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली / नवसारी

राजनीतिक संगठन के लिए एयरकंडीशंड हॉल, हाईस्पीड इंटरनेट और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक उपलब्ध है, लेकिन देश का भविष्य कहे जाने वाले लाखों छात्रों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित छत तक नसीब नहीं। दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र पीजी की पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के ठीक दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नवसारी में भाजपा के अत्याधुनिक ‘नमो कमलम’ कार्यालय का उद्घाटन किया। ४० हजार वर्ग फुट में पैâले कार्यालय को भाजपा का पहला एआई आधारित जिला कार्यालय बताया गया है। इससे पहले ६ सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा में भाजपा के नए प्रदेश कार्यालय ‘अटल भवन’ का उद्घाटन किया था।
जेन-जी पूछ रहा है ऐसा ही राष्ट्रीय मिशन छात्रों के लिए क्यों नहीं?
देश की राजधानी का हाल देखिए। दिल्ली विश्वविद्यालय में ढाई लाख से अधिक छात्र हैं, लेकिन हॉस्टल बेड करीब ९,०००। हजारों विद्यार्थियों को मजबूरन निजी पीजी, किराए के मकानों और अनियंत्रित छात्र आवासों पर निर्भर होना पड़ता है। सत्य निकेतन की त्रासदी इसी संकट की भयावह तस्वीर बनकर सामने आई।
मुंबई में भी कहानी अलग नहीं है। मुंबई विश्वविद्यालय के कालीना कैंपस में पुरुष छात्रों के लिए हॉस्टल की भारी कमी के कारण बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को महंगा किराया चुकाना पड़ रहा है और कुछ छात्र पढ़ाई या दाखिला छोड़ने पर विचार करने तक मजबूर हुए। एक ८० छात्रों की क्षमता वाला हॉस्टल ११० छात्रों के साथ चलने की रिपोर्ट सामने आई थी।
कोटा में अप्रैल २०२४ में पांच मंजिला छात्र हॉस्टल में आग लगी तो सात से आठ विद्यार्थी घायल हुए। पुलिस ने मालिकों के खिलाफ कथित सुरक्षा लापरवाही का मामला दर्ज किया। घटना के वक्त करीब ७५ विद्यार्थी वहां रह रहे थे। उसी शहर में एक अन्य हॉस्टल को छात्र सुरक्षा के लिए निर्धारित एंटी-सुसाइड उपकरण नहीं होने पर प्रशासन ने सील किया था।
आगरा में स्थिति और चौंकाती है,शहर में सैकड़ों पीजी-हॉस्टल चलने के बावजूद विकास प्राधिकरण के रिकॉर्ड में एक भी पंजीकृत हॉस्टल नहीं होने की बात सामने आई है। हालात इतने गंभीर हैं कि सत्य निकेतन हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट अब छात्र पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर रहा है।
एआई छात्रों के लिए या आईटी सेल के लिए?
नवसारी में भाजपा का नया जिला कार्यालय एआई से लैस है। सवाल यह है कि ऐसी आधुनिक तकनीक की पहली जरूरत किसे है-पढ़ाई, रिसर्च, स्कॉलरशिप, हॉस्टल सुरक्षा और करियर से जूझ रहे छात्रों को या राजनीतिक प्रचार मशीनरी को? भाजपा की आईटी सेल पर विपक्ष और आलोचक लंबे समय से भ्रामक सूचनाएं और आक्रामक प्रचार फैलाने के आरोप लगाते रहे हैं, हालांकि पार्टी इन्हें खारिज करती रही है। ऐसे में जेन-जी पूछ सकता है-एआई का इस्तेमाल छात्रों की जिंदगी आसान बनाने में होगा या राजनीतिक नैरेटिव और तेज करने में? तकनीक का असली सम्मान तभी है, जब उसका पहला लाभ देश के भविष्य को मिले।
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद जब छात्र आवासों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे, तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि समस्या केवल दिल्ली की नहीं है और देशभर के पीजी, हॉस्टल तथा छात्र आवासों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि वह पैन इंडिया स्तर पर उपायों पर विचार करेगी। सवाल यह है कि जो काम केंद्र और राज्य सरकारों को पहले करना चाहिए था, उसके लिए भी क्या अदालत के हस्तक्षेप का इंतजार जरूरी था? हादसे के बाद जागने वाली व्यवस्था पर अब सुप्रीम कोर्ट की नजर है।
अब जेन-जी का सवाल सरकार से सीधा है
पार्टी कार्यकर्ता के लिए ७६८ कार्यालयों का राष्ट्रीय अभियान चल सकता है, एआई वाला दफ्तर बन सकता है, भव्य प्रदेश मुख्यालय खड़े हो सकते हैं, तो करोड़ों छात्रों के लिए सुरक्षित हॉस्टलों का राष्ट्रीय अभियान क्यों नहीं? देश का भविष्य भाषणों में युवा है, लेकिन भवन निर्माण की प्राथमिकताओं में युवा आखिर कहां है?

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