-दीये जले, लाइटें चमकीं, लेकिन जनता का उत्साह रहा फीका
-पीएम के ‘आशीर्वाद’ में आई कमी?
-`द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट से बीजेपी के भीतर उठे सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ७६वें जन्मदिन पर भाजपा और भाजपा शासित राज्यों ने जिस तरह मेगा जश्न मनाया, अब उसी आयोजन की चमक पर पार्टी के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। १७ सितंबर को देशभर में दीये जलाने, लाइट शो, बाइक रैलियों और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लेकिन `द टेलीग्राफ’ की २१ सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के कुछ नेताओं को आम लोगों की प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक उत्साहजनक नहीं लगी।
रिपोर्ट में एक भाजपा नेता के हवाले से कहा गया है कि आम लोगों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं दिखाई दी। पार्टी का मकसद मोदी के देशसेवा के संदेश को सामने रखना था, लेकिन कुछ नेताओं को आशंका है कि जरूरत से ज्यादा भव्य आयोजनों का असर उलटा पड़ सकता है। खासकर, ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा है। कोविड काल में प्रधानमंत्री की अपील पर जिस तरह बड़े पैमाने पर लोगों ने दीये जलाए थे, इस बार वैसा स्वत:स्फूर्त जनउत्साह नजर नहीं आया।
भाजपा के भीतर सवाल केवल भागीदारी को लेकर नहीं, बल्कि आयोजन के पैमाने और खर्च को लेकर भी उठे। उज्जैन में भव्य लाइट शो और बिहार में गंगा किनारे दीया जलाने के कार्यक्रमों पर सोशल मीडिया में भी प्रतिक्रियाएं सामने आर्इं। बिहार में बाढ़ के बीच हुए आयोजन को लेकर संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भाजपा पहले मोदी के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर और अन्य सेवा गतिविधियों जैसे अपेक्षाकृत सादे कार्यक्रम करती रही है। इस बार जश्न का पैमाना काफी बड़ा किया गया।
