सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा के मलाईदार विभागों में सालों से जमे भ्रष्ट अधिकारियों और इंजीनियरों का साम्राज्य अब ढहने वाला है। मनपा प्रशासन ने पारदर्शिता लाने के लिए तबादला प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है, जिससे लगभग ८०० इंजीनियरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। १ अक्टूबर से इनके आधिकारिक तबादला आदेश जारी कर दिए जाएंगे। प्रशासन के इस कड़े रुख से मनपा के गलियारों में भारी खलबली मच गई है।
मनपा में इंजीनियर के पद को लंबे समय से अवैध कमाई का जरिया माना जाता रहा है। कुछ विशेष विभागों में नियुक्ति पाना भ्रष्टाचारियों के लिए सोने की खदान से भी ज्यादा कीमती साबित होता है, जिसके लिए लाखों-करोड़ों रुपये की रिश्वत देने से भी परहेज नहीं किया जाता। नियमों के मुताबिक, हर साल १ से १५ अक्टूबर के बीच ३ साल या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर टिके २५ प्रतिशत कर्मचारियों का तबादला होना अनिवार्य है। इसके बावजूद, कई इंजीनियर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के दम पर १० से १७ सालों से एक ही जगह पर कुंडली मारे बैठे थे। ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होते ही इन अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। कई भ्रष्ट इंजीनियर और उनकी एसोसिएशन अब इस प्रक्रिया को टालने या रद्द कराने के लिए प्रशासन पर तरह-तरह का दबाव बना रहे हैं। तबादलों के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि २० सितंबर थी, जिसमें १८ सितंबर तक ही ४९४ आवेदन मिल चुके थे। आवेदनों की बारीकी से जांच के बाद १ से १५ अक्टूबर के बीच तबादलों की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी। हर प्रकार के दबाव को खारिज करते हुए मनपा प्रशासन अपने इस फैसले पर पूरी तरह अड़ा हुआ है।
