-उच्च न्यायालय ने सरकार को लगाई फटकार
सामना संवाददाता / मुंबई
डीजे बजाने और पटाखे फोड़ने के लिए रात १२ बजे तक अनुमति आखिर दी ही कैसे जाती है, इस पर तीखी नाराजगी जताते हुए उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार को इससे संबंधित सभी नियमों और प्रावधानों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया। न्यायालय ने राज्य सरकार को मंगलवार तक यह पूरी जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि इस मामले में उचित आदेश जारी किए जा सकें।
बता दें कि गणेशोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम से होने वाले कर्कश ध्वनि प्रदूषण पर आखिरकार मुंबई हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुंबई हाई कोर्ट ने उत्सवों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से ध्वनि प्रदूषण नियमों की मौजूदा स्थिति और उनके अमल की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने साफ किया कि अदालत का किसी धर्म या त्योहार के आयोजन का विरोध नहीं है, लेकिन उत्सव मनाते समय दूसरों को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखना जरूरी है। अदालत ने यह भी पूछा कि गणेशोत्सव और विसर्जन जुलूसों में निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन हो रहा है या नहीं और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। हाई कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सख्त रुख दिखाया है। क्षमता से ज्यादा आवाज करने वाले साउंड सिस्टम को जब्त करने और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजे को लेकर क्या नीति है?
आवाज की सीमा को लेकर कोई नियमावली है या नहीं और यदि है तो उसका पालन हो रहा है या नहीं, इस पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि यदि डीजे को लेकर कोई नीति है तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। यदि ऐसी कोई नीति नहीं है, तो मंगलवार को इस संबंध में उचित आदेश जारी किए जाएंगे, ऐसा भी खंडपीठ ने स्पष्ट किया।
वृद्धों को बेवजह परेशानी
न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि घर में टेलीविजन की आवाज थोड़ी अधिक होने पर भी वृद्ध लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़कों पर तेज आवाज में डीजे बजाया जाता है और पटाखे फोड़े जाते हैं। इससे आम नागरिकों और विशेष रूप से वृद्धों को कितनी परेशानी होती होगी, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय ने तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
न्यायालय ने राज्य सरकार को मंगलवार तक यह पूरी जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि इस मामले में उचित आदेश जारी किए जा सकें।
