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चिलचिलाती धूप में चिंगारी भड़की…मुंबई की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब! वोटचोरी और भ्रष्ट चुनाव आयोग के खिलाफ विराट व अपार मोर्चा!!..ठाकरे की गर्जना; ज्ञानू गेट आउट!

-लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए महाराष्ट्र धधक उठा

सामना संवाददाता / मुंबई
देश में चुनावी घोटालों और वोटीचोरी के खिलाफ मुंबई में कल रविवार को शिवसेना-मनसे की गगनभेदी ‘गर्जना’ सुनाई दी। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकले विराट और अपार ‘गर्जना’ मोर्चे में पूरा महाराष्ट्र एकजुट दिखाई दिया। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए शिवसेना-मनसे द्वारा दिए गए आह्वान को विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ ही आम जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिला। चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना राज्य के कोने-कोने से हजारों लोग मुंबई पहुंचे। इस विशाल जनसमुदाय की मौजूदगी में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार की कथित मनमानी पर जमकर प्रहार किया। इसके बाद हजारों प्रदर्शनकारियों ने मुट्ठियां भींचकर ‘इंडिया अगेंस्ट वोटचोर’ का नारा बुलंद किया। उद्धव ठाकरे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी समय नहीं गया है। आज हमने केवल कदम उठाया है। अगर हमारे अधिकार छीनने की कोशिश की गई तो कल हाथ भी उठाना पड़ेगा। वहीं राज ठाकरे ने दो टूक कहा कि सत्ता में कौन आएगा, इसका पैâसला जनता करेगी, चुनाव आयोग नहीं। मोर्चे की विशालता और जनसमर्थन ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष ने दावा किया कि इस प्रदर्शन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को और बल दिया है।

उद्धव ठाकरे का नारा गूंजा
इंडिया अगेंस्ट वोट चोर!
आज हमने केवल कदम उठाए हैं, अधिकार छीनोगे तो कल हाथ भी उठ सकता है

केंद्र की भाजपा सरकार ने सिर्फ वोटचोरी ही नहीं, राम मंदिर में चंदा चोरी, पार्टियां चोरी किया है। यह सरकार नामर्द सरकार है। ऐसे तीखे शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोला है। शिवसेना-मनसे के गर्जना मोर्चे को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने देश में कथित चुनावी गड़बड़ियों के उदाहरण देते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने देश के १३ करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने पर भड़कते हुए कहा कि देश क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बाप का है। उन्होंने जनता से ‘इंडिया अगेंस्ट वोट चोर’ का नारा गली-गली पहुंचाने का जोरदार आह्वान किया।

क्या देश
ज्ञानेश कुमार के बाप का है?
`गर्जना मोर्चा’ में मुख्य चुनाव आयुक्त पर गरजे उद्धव ठाकरे
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य के मतदाता वैध हैं या अवैध, यह तय करने का अधिकार स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सारी शक्ति केंद्र के हाथों में दी जा रही है और अंतत: हर पैâसला ज्ञानेश कुमार ही करेंगे। उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा कि क्या देश ज्ञानेश कुमार के बाप का है? उद्धव ठाकरे ने कहा कि अधिकारों की व्यवस्था समझी जा सकती है, लेकिन मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि एसआईआर के नाम पर महाराष्ट्र में तीन करोड़, तमिलनाडु में ५० लाख और बंगाल में ३० लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। पूरे देश में करीब १३ करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने कहा कि बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए कुछ मतदाता बाद में वैध पाए गए। लेकिन उन्हें मतदान करने की अनुमति मिलेगी या नहीं, इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने अभी तक पैâसला नहीं दिया है। कोर्ट में तारीख पर तारीख दी जा रही है। सुनवाई होगी या नहीं, यह भी निश्चित नहीं है। जबकि अन्य मतदाताओं की जांच पूरी होने और उसका परिणाम आने में कई महीने लगेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सभी संस्थाओं को सत्ताधारी कब्जियाने की कोशिश में है।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति ही पक्षपातपूर्ण
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में राष्ट्रपति का चुनाव होता है, लेकिन चुनाव आयुक्त का चुनाव नहीं होता। उन्हें सीधे नियुक्त किया जाता है। उनकी नियुक्ति के लिए पीएम, विपक्ष नेता, मुख्य न्यायाधीश तीन सदस्यीय समिति में से मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया गया है। उसकी जगह एक मंत्री को अर्थात मंत्री अमित शाह को शामिल किया गया। अब सरकार का बहुमत हो गया। इस पर राहुल गांधी कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट का पैâसला अभी तक आया नहीं।
ज्ञानेश कुमार को अधिकार नहीं
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि केंद्र सरकार के एक सचिव आर. के. सिंह ने एसआईआर को गैरकानूनी बताया है। उन्होंने कहा कि नागरिकता रद्द करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। यह अधिकार गृह मंत्रालय के पास है और गृह मंत्रालय अमित शाह के अधीन है। तो फिर चुनाव आयोग को यह पैâसला लेने का अधिकार किसने दिया?
अंधभक्तों तुम्हारा भी नुकसान हो रहा है!
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अमित शाह खुद को सरदार वल्लभभाई पटेल की तरह `लौहपुरुष’ कहलवाते हैं। लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल में एक चुनाव के लिए एक महिला के खिलाफ सेना भेजी। क्या आपकी लोकतांत्रिक व्यवस्था यही है? ऐसी घटिया लोकतांत्रिक व्यवस्था हम स्वीकार नहीं करते। उन्होंने अंधभक्तों को चेताते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि देश में जो कुछ हो रहा है, उससे उनका क्या लेना-देना है, तो यह उनका भ्रम है। तुम्हारा भी नुकसान हो रहा है।
तुम्हारी पुलिस कर क्या रही है?
उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ठाणे में हमारे पूर्णेकर की हत्या हुई। उन्होंने सवाल किया कि तुम्हारी पुलिस कर क्या रही है? गृहमंत्री कहां हैं? देशभर में महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है। यही आपका हिंदुत्व है?
कितने बांग्लादेशी पकड़े?
सरकार की ओर से एसआईआर लागू करने का एक कारण बांग्लादेशी नागरिकों को तलाशना बताया जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने इस दावे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर बांग्लादेशियों को खोज निकालना ही उद्देश्य है तो अब तक मतदाता सूची से हटाए गए दो करोड़ मतदाताओं में कितने बांग्लादेशी थे, यह हमें बताइए। उन्हें बाहर निकालकर सीमा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम लेते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब देश की सीमाओं की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के हाथ में है तो बांग्लादेशी देश में आए ही वैâसे और उन्हें यहां रहने किसने दिया?
हिटलर का उदाहरण देकर
अधिकारियों को चेतावनी
सरकार के इशारे पर काम करने वाले अधिकारियों को उद्धव ठाकरे ने हिटलर का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हिटलर के शासनकाल में कई अधिकारी उसके अपराधों में सहभागी बने थे। हिटलर की मृत्यु के बाद उन अधिकारियों को खोजकर निकाला गया और उनके खिलाफ मुकदमे चलाए गए। कुछ को फांसी दी गई, जबकि कुछ लोग जेल में सड़ते रहे। उद्धव ठाकरे ने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि सरकार के आदेश पर अन्याय करने वालों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे हमेशा बच जाएंगे। आने वाले समय में उन्हें भी अपने किए की सजा भुगतनी पड़ेगी।
गर्जना मोर्चे में पहुंचे विपक्षी दिग्ग्जों
मोर्चे के दौरान मंच पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राऊत, चंद्रकांत खैरे, अरविंद सावंत, सुभाष देसाई और मनसे नेता अमित ठाकरे उपस्थित रहे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं में अनिल देशमुख, शशिकांत शिंदे, जयंत पाटील और जितेंद्र आव्हाड शामिल थे। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार, शेतकरी कामगार पक्ष के जयंत पाटील भी मोर्चे में शामिल हुए। इसके अलावा शिवसेना के विधायक अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर, मनसे नेता बाला नांदगांवकर, नितिन सरदेसाई और अविनाश जाधव, शिवसेना सचिव साईनाथ दुर्गे तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सुभाष पाटील-लांडे सहित अनेक प्रमुख नेता मंच पर मौजूद रहे।

राज ठाकरे का हमला
एसआईआर रद्द करो!
सत्ता पर किसे बिठाना है जनता तय करेगी, चुनाव आयोग नहीं
महाराष्ट्र में अब तक हुई एसआईआर की पूरी प्रक्रिया रद्द की जानी चाहिए। मूल रूप से पूरे देश में एक साथ शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया ही गैरकानूनी है। इसे रद्द करने के साथ ही ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराया जाना चाहिए। ऐसी जोरदार हुंकार मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने रविवार को गर्जना मोर्चे में भरी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इन प्रमुख मांगों को लेकर दिल्ली में आवाज उठाने का आह्वान किया। राज ठाकरे ने इस दौरान चुनाव आयोग को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि किसे चुनना है, किसे सत्ता में बैठाना है और किसे विपक्ष में भेजना है, यह देश के मतदाताओं को तय करने का अधिकार है। इसका पैâसला चुनाव आयोग नहीं कर सकता। उन्होंने अपने आक्रामक अंदाज में चुनाव आयोग के साथ ही सत्ताधारी भाजपा को भी जमकर घेरा। भाषण की शुरुआत में ही राज ठाकरे ने चुनावी घोटाले के कारण देश में गरमाते माहौल की ओर सत्ताधारियों का ध्यान आकर्षित किया और वोटचोरी को लेकर तीखा हमला बोला।

लोकतंत्र पर डाका डाल
रही है केंद्र सरकार
वोटचोरी’ पर राज ठाकरे का वार, चुनाव आयोग को घेरा
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि २०१७-१८ से ही मैं लगातार कह रहा हूं कि मतों की चोरी शुरू हो गई है। उस समय मैंने सोनिया गांधी, ममता बनर्जी सहित कई नेताओं से मुलाकात की थी और उन्हें लगातार बताया था कि चुनाव आयोग, मतदान मशीनों और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी चल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव का बहिष्कार किया जाना चाहिए, तभी ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होगा।
केंद्र सरकार मनमानी रूप से कामकाज कर रही है। चुनाव आयोग के माध्यम से वोटचोरी, लोकतंत्र पर डाका डाल रही है। दूसरी ओर अमेरिका के सामने मोदी सरकार नतमस्तक हो रही है तो वहीं देश की तमाम संपत्ति एक ही उद्योगपति को सौंप रही है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी हिम्मत इनमें आती कहां से है? जबकि कांग्रेस के राज में ऐसा नहीं था, सभी उद्योगपतियों को बढ़ावा मिला। यदि ऐसा ही रहा तो देश की अर्थव्यवस्था को डूबना है। ये लोग डुबाकर रहेंगे। इसलिए इन्हें जल्द भगाना होगा। उन्होंने इस दौरान स्पष्ट कहा कि आज जिस तरह से मोदी सरकार कर रही है कल यह सत्ता में नहीं रहे, उनकी सरकार गई और दूसरी जो सरकार बनेगी, तब अगर वही उनके साथ ऐसा करेगी तो यह कहां जाएंगे। राज ठाकरे ने साफ कहा कि कल सत्ता में कोई भी आए, उन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुद्दा सत्ता का नहीं, बल्कि चुनाव की विश्वसनीयता और मतदाता के अधिकार का है। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि अब तक जो एसआईआर हुआ है, उसे रद्द करना होगा। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह के मत का हवाला देते हुए कहा कि विशेष पुनरीक्षण असाधारण परिस्थितियों में, कारणों को लिखित रूप से दर्ज करने के बाद और किसी विशेष चुनाव क्षेत्र तक सीमित रखते हुए किया जा सकता है। पूरे देश में एक साथ ऐसी प्रक्रिया चलाने का कानून में प्रावधान नहीं है फिर पूरे देश में मतदाता सूचियों की ऐसी व्यापक छंटनी क्यों की जा रही है? राज ठाकरे ने केंद्र और चुनाव व्यवस्था पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के समय मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ती है और अब विशेष पुनरीक्षण के नाम पर करोड़ों लोगों के नाम बाहर किए जा रहे हैं। आखिर ये मतदाता कौन हैं? क्या ये हमारे मतदाता नहीं हैं?

 

 

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