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दिल्ली पुलिस के ‘झूठ’ को दीपके ने किया तार-तार!…‘हिम्मत है तो पूरा अनएडिटेड वीडियो जारी करो’

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और दिल्ली पुलिस के बीच जारी विवाद ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि हिरासत में दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी गई और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए यात्रा की व्यवस्था करने की पेशकश भी की गई। लेकिन सोमवार को दीपके ने पुलिस के इस वीडियो को अधूरा और संपादित बताते हुए पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की चुनौती दे डाली।
दीपके ने सवाल उठाया कि पुलिस ने केवल वही हिस्सा क्यों जारी किया, जिसमें महिला अधिकारी उन्हें दादी के निधन की जानकारी देती दिखाई दे रही हैं? उन्होंने दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्होंने बार-बार अपने चचेरे भाई और वकील से बातचीत कराने का अनुरोध किया था। यहां तक कि केवल दो मिनट के लिए अपना मोबाइल फोन मांगा, ताकि परिवार से संपर्क कर सकें, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई।
‘दो मिनट को फोन नहीं दिया,
अब मदद का दावा कर रहे हैं!’
दीपके के मुताबिक, दिल्ली पुलिस जिस मानवीय संवेदना का प्रदर्शन अपने वीडियो के जरिए कर रही है, उसकी सच्चाई पूरी रिकॉर्डिंग सामने आने पर स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न केवल परिवार से संपर्क करने से रोका गया, बल्कि हिरासत के दौरान उन पर मानसिक दबाव भी बनाया गया। दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला। उनके अनुसार, परिवार को हिरासत की जानकारी देने की प्रक्रिया में भी अनावश्यक मानसिक परेशानी पैदा की गई। उन्होंने इसे अपने और परिवार के साथ मानसिक प्रताड़ना बताया।
दादी का अंतिम संस्कार छूटा, पुलिस ने जारी कर दिया सफाई वाला वीडियो!
दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव ने दावा किया कि दीपके को निधन की सूचना मिलने के बाद विमान यात्रा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने जाने से इनकार कर दिया। पुलिस ने इस दावे के समर्थन में वीडियो भी सार्वजनिक किया।
दादी के निधन की सूचना देने वाला वीडियो जारी कर अपनी सफाई पेश करने वाली दिल्ली पुलिस अब नए सवालों के घेरे में है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस पर अधूरा वीडियो दिखाकर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया है। उनका सवाल है, जब सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ, तो पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है?
अब असली सवाल, पूरी रिकॉर्डिंग सामने क्यों नहीं आती?
यदि दीपके ने अपने वकील और परिवार से बातचीत करने की मांग की थी, तो पुलिस ने उस पर क्या कार्रवाई की? उनके अनुरोधों का क्या रिकॉर्ड है? उन्हें फोन इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों नहीं मिली? ऐसे में पूरी, बिना काट-छांट की रिकॉर्डिंग सामने आने से दोनों पक्षों के दावों की जांच हो सकेगी।

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