सामना संवाददाता / मुंबई
जगह की तंगी झेलती मुंबई में सार्वजनिक जमीन पर बने आलीशान क्लबों के विशेषाधिकार अब समीक्षा के दायरे में हैं। सरकारी समिति ने जिमखाना और क्लबों की जमीन का किराया बाजार दर से जोड़ने तथा उनके मैदानों तक आम लोगों की पहुंच बढ़ाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव लागू होने पर सदस्यों तक सीमित इन परिसरों के दरवाजे निर्धारित समय में सामान्य नागरिकों के लिए भी खुल सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के खुले स्थानों का लगभग पांचवां हिस्सा ऐसे क्लबों के पास है।
समिति की सिफारिशों में हर पांच वर्ष में किराए की समीक्षा और आयोजनों के लिए `१.५ लाख शुल्क का प्रस्ताव शामिल है। प्राकृतिक आपदा, चुनाव तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सरकार को क्लबों के मैदान इस्तेमाल करने की सुविधा देने की बात भी कही गई है। फिलहाल ये सिफारिशें हैं; आम जनता के प्रवेश का समय, प्रक्रिया और अन्य शर्तें अंतिम नीति से स्पष्ट होंगी।
यह बहस केवल किराया बढ़ाने की नहीं है। जिस शहर में बच्चों के खेलने, युवाओं के अभ्यास और बुजुर्गों के टहलने के लिए खुली जगह दुर्लभ हो, वहां सरकारी जमीन का सार्वजनिक लाभ क्या होना चाहिए? प्रस्ताव की असली परीक्षा इसी सवाल पर होगी कि आम नागरिकों को मिलने वाला प्रवेश कितना नियमित, उपयोगी और सहज होगा।
आपदा में सरकार कर सकेगी मैदानों का इस्तेमाल
प्रस्ताव के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा, चुनाव और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सरकार क्लबों के मैदानों का इस्तेमाल कर सकेगी। साथ ही, आम नागरिकों के लिए प्रवेश बढ़ाने की सिफारिश की गई है। अंतिम नीति में प्रवेश का समय, प्रक्रिया और शर्तें तय होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
