मुख्यपृष्ठविश्वअमेरिका अजेय, दुनिया बेबस?

अमेरिका अजेय, दुनिया बेबस?

-धीरज फूलमती सिंह, मुंबई
दुनिया और भारत, दोनों के लिए यह बात पचाना मुश्किल हो सकती है, लेकिन सच्चाई यही है कि अमेरिका बाकी सभी ताकतवर देशों से करीब १०० साल आगे है। अब जब अमेरिका ने भारत के साथ अपने रिश्ते खराब कर लिए हैं, तो हमें यह बात स्वीकार करनी ही पड़ेगी।
जब तथाकथित एक्सपर्ट अमेरिका का मजाक उड़ाने और मीम बनाने में लगे हुए थे, उसी समय अमेरिका चुपचाप इतिहास का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खेल खेल रहा था
अमेरिका ने चुपचाप ग्रीनलैंड में अपना स्थायी सैन्य नियंत्रण मजबूत कर लिया। चीन और रूस को आर्कटिक से बाहर कर दिया और बिना एक गोली चलाए, बिना एक डॉलर खर्च किए, पूरे उत्तरी गोलार्ध में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। फिर जनवरी २०२६ में अमेरिका ने सिर्फ वेनेजुएला पर प्रतिबंध नहीं लगाए। अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज सीधे काराकस पहुंचीं, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया, उन्हें एक अमेरिकी युद्धपोत पर ले गर्इं और फिर न्यूयॉर्क की अदालत में पेश कर दिया। दुनिया के किसी और देश में इतनी ताकत नहीं है कि वह किसी दूसरे देश की राजधानी से उसके मौजूदा राष्ट्रपति को पकड़कर ले जाए।
इसके बाद फरवरी २०२६ में अमेरिका और इजरायल ने सीधे तेहरान पर हमला किया। उन्होंने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को पार करते हुए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को उनके भूमिगत बंकर में ही मार दिया। आज उनके उत्तराधिकारी छिपते फिर रहे हैं। ईरानी शासन बिखर चुका है, जबकि अमेरिकी जमीन पूरी तरह सुरक्षित है।
उधर, चीन दुनिया में अपनी बादशाहत की बातें करता रहा, लेकिन अमेरिका ने टेक्नोलॉजी की दौड़ में उसकी कमर तोड़ दी। अमेरिका ने कड़े सेमीकंडक्टर प्रतिबंध लगाकर चीन को अगली पीढ़ी की एआई चिप्स से दूर कर दिया। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बियां दीं और फिलीपींस में सैन्य ठिकाने बढ़ाए। यानी चीनी नौसेना को फर्स्ट आइलैंड चेन के अंदर घेर दिया। रूस की हालत भी देखिए। रूस अपनी आबादी और आने वाली पीढ़ियों की ताकत को युद्ध में खर्च कर रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका ने नाटो का विस्तार किया, यूरोप के अपने सहयोगियों को हथियार दिए और रूस को आर्कटिक में भी घेर दिया। खास बात यह है कि अमेरिका को अपने सैनिकों की बड़ी लड़ाकू टुकड़ियां सीधे युद्ध के मैदान में भेजने की जरूरत तक नहीं पड़ी।
कुल मिलाकर, पिछले दो साल में अमेरिका ने जितना भू-राजनीतिक दबदबा बनाया है, उतना बाकी पांच बड़ी सैन्य ताकतें मिलकर भी नहीं बना पार्इं। उसके दुश्मन या तो आर्थिक रूप से टूट रहे हैं या बंकरों में छिपे हैं, या फिर न्यूयॉर्क की अदालत में बैठे हैं।

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