मुख्यपृष्ठअपराधतहकीकात : खतरनाक बनता जा रहा नया अंडरवर्ल्ड

तहकीकात : खतरनाक बनता जा रहा नया अंडरवर्ल्ड

-फिरोज खान
मुंबई के अंडरवर्ल्ड में चेहरे बदल गए हैं, लेकिन संगठित अपराध का खतरा बरकरार है। कभी दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अमर नाईक और अरुण गवली जैसे गैंगस्टरों का दबदबा था, तो आज लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सुर्खियों में है। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त डी. शिवानंदन के मुताबिक, मौजूदा हालात की तुलना सीधे पुराने अंडरवर्ल्ड से करना जल्दबाजी होगी, लेकिन अपराध के बदलते स्वरूप को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
शिवानंदन द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू के अनुसार, १९८० और १९९० के दशक के अपराधियों और आज के गैंगस्टरों के काम करने के तरीकों में बड़ा अंतर है। उस दौर में तकनीकी सुविधाएं सीमित थीं, जबकि आज अपराधी इंटरनेट, वीपीएन और डिजिटल संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। आधुनिक हथियारों और अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों ने पुलिस के सामने चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
अब गैंग के सरगना का घटनास्थल पर मौजूद होना भी जरूरी नहीं। कथित तौर पर दूसरे शहर या देश में बैठकर नेटवर्क के जरिए वारदातों को अंजाम दिलाने की आशंका रहती है। ऐसे में केवल शूटर की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं, बल्कि अपराध की साजिश रचने वालों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है।
बाबा सिद्दीकी की हत्या, सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी और फिल्मी हस्तियों को मिल रही धमकियों ने मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बिश्नोई गैंग सोशल मीडिया पर वारदातों की जिम्मेदारी लेने और चर्चित हस्तियों को निशाना बनाने के कारण सुर्खियों में रहा है। शिवानंदन के मुताबिक, बॉलीवुड को डराकर कथित वसूली के लिए दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। नए अंडरवर्ल्ड की चुनौती सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उनके आर्थिक स्रोतों, संपर्कों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करना है। हालांकि, इन घटनाओं के आधार पर पुराने गैंगस्टर राज की वापसी घोषित करना जल्दबाजी होगी।
सवाल यही है कि बदलती तकनीक और सीमाओं के पार पैâले अपराधी नेटवर्क से निपटने के लिए पुलिस कितनी तैयार है। अपराधियों के तौर-तरीके बदल रहे हैं, ऐसे में जांच और कानून लागू करने की रणनीति को भी उसी गति से मजबूत करना होगा।

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