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मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान की चौखट पर पहुंचा सऊदी तो हूतियों ने गिना दी अपनी शर्तें!

-सूफी खान
सऊदी अरब ने यमन के अंसारुल्लाह पर पहला अटैक तो कर दिया था, लेकिन इसका आकलन ठीक से नहीं कर पाया कि जब उधर से पलटवार होगा तो कैसे निपटना है। यही वजह है कि सऊदी को अपने डिफेंस पार्टनर तुर्की और पाकिस्तान से मदद मांगनी पड़ी और यहां तक कि मिस्र से भी गुहार लगानी पड़ी कि हमारी सुरक्षा करो।
जब उनसे भी कुछ नहीं हो पाया तो आखिरकार उसे ईरान की चौखट पर ही हाजिरी लगानी पड़ी। आगे ईरान इस मामले में कितना दखल देता है और यमन के अंसारुल्लाह उसकी कितनी सुनते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन जंग के इस मोड़ पर आकर हूतियों की डिमांड क्लियर है। वे कह रहे हैं कि सऊदी पहले उन पर बरसों से लगाया गया एयर ब्लॉकेड हटाए, नेवल ब्लॉकेड हटाए तो वे जंग रोक देंगे। एयर ब्लॉकेड मतलब वह हवाई रोक, जिसमें सऊदी की कयादत वाले एलायंस ने यमन के हूती कंट्रोल वाले इलाकों के अहम हवाई अड्डों जैसे सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों की आवाजाही को प्रतिबंधित या बाधित किया हुआ है। सऊदी जिसे नहीं चाहेगा, उसके प्लेन वहां से न उड़ेंगे और न ही वहां आएंगे। इस बार तो झगड़ा इसी बात से शुरू भी हुआ था, जब अंसारुल्लाह डेलिगेशन को ईरान से ला रहे ईरानी प्लेन को सऊदी ने निशाना बनाया था और सना एयरपोर्ट पर बम मारे थे। वह दिन है और आज का दिन, हूतियों ने तहलका मचा रखा है।
अब हूती चाहते हैं कि एयर ब्लॉकेड हटाओ, साथ में नेवल ब्लॉकेड भी यानी समुद्री रोक-टोक हटाओ। इसके अलावा यमन के जो तेल और गैस के रिसोर्स हैं, जिन्हें सऊदी यमन में अपनी हिमायती सरकार के जरिए चला रहा है और जिनसे भारी कमाई होती है, अब हूतियों का कहना है कि उन पैसों से सऊदी अरब यमन में जो सरकारी कर्मचारी हैं, उन्हें सैलरी दे।
अब सऊदी की मुश्किल यहां और बढ़ जाती है, क्योंकि हूतियों की ये शर्त सऊदी के जरिए मान ली जाए तो उस पर सवाल उठेंगे कि साल २०२२ से क्यों नहीं किया? उस वक्त भी सऊदी-हूती समझौते का यह अहम पॉइंट था कि पैसा देना पड़ेगा। लेकिन हूतियों का आरोप है कि सऊदी इससे मुकर गया। यमन के हूतियों के कंट्रोल वाले हिस्से में हालात और खराब हो गए।
मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट कहते हैं कि यमन के अंसारुल्लाह यह जंग तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक कि उन पर से एयर और नेवल ब्लॉकेड नहीं हट जाते। आमतौर पर अब तक यमन के हूतियों को ईरान के रेजिस्टेंस का ही हिस्सा माना जाता था, लेकिन इस बार अंसारुल्लाह लड़ाकों ने साबित करके दिखा दिया कि वे अपनी धरती के लिए अपने पैâसले खुद लेंगे। हां, हो सकता है कि ईरान उनकी हथियारों और तकनीक से मदद कर रहा हो। उनके पीछे और भी ताकतें हों। लेकिन जिस तरह हूती सऊदी अरब पर हमलावर हैं, उससे लगता नहीं कि वे बिना किसी बड़ी डील या बराबरी के समझौते के अब पीछे हटेंगे।

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