मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई में विकास के नाम पर पेड़ों की बलि!

मुंबई में विकास के नाम पर पेड़ों की बलि!

-६ साल में २१,०२८ कटे, कई मामलों में ७८ प्रतिशत  तक पेड़ नहीं बच पा
उमन गुप्ता 
मुंबई। मुंबई में सड़क, मेट्रो, कोस्टल रोड और पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों को हटाने की मंजूरी लगातार मिल रही है। पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए कुछ पेड़ों को दूसरी जगह लगाने और क्षतिपूरक पौधारोपण की व्यवस्था भी की जाती है। लेकिन इन उपायों की असली सफलता कितनी है? उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और ऑडिट रिपोर्टों में प्रत्यारोपित पेड़ों के जीवित रहने की दर को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
मार्च २०२४ की रिपोर्ट के मुताबिक, मनपा ने आरटीआई के जवाब में बताया था कि २०१८ से २०२३ के बीच मुंबई में विकास परियोजनाओं के लिए २१,०२८ पेड़ काटे गए और २१,९१६ पेड़ों का प्रत्यारोपण किया गया। हालांकि, प्रत्यारोपित पेड़ों के जीवित रहने का डेटा सभी २४ वार्डों के लिए उपलब्ध नहीं था। जिन नौ वार्डों के आंकड़े रिपोर्ट में दिए गए, उनमें ४,३३८ प्रत्यारोपित पेड़ों में से केवल ९६३ जीवित पाए गए। यह लगभग २२.२ प्रतिशत है यानी करीब ७७.८ प्रतिशत पेड़ जीवित नहीं पाए गए। यह निष्कर्ष केवल उन वार्डों के उपलब्ध आंकड़ों पर लागू होता है, पूरे मुंबई पर नहीं।
मेट्रो परियोजना में भी उठे सवाल
अक्टूबर २०२५ में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि मुंबई मेट्रो परियोजना के लिए क्षतिपूरक पौधारोपण के तहत लगाए गए २०,४६० पेड़ों में से लगभग ५० प्रतिशत ही जीवित बचे थे। अदालत ने कम जीवित रहने की दर पर चिंता जताई और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर क्षतिपूरक पौधारोपण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करने को कहा था।
पांच महीने में ७,६३३ पेड़ों को हटाने की मंजूरी
२३ अक्टूबर २०२६ की रिपोर्ट के मुताबिक, मनपा की ट्री अथॉरिटी ने मई से ५ अक्टूबर २०२६ के बीच हुई आठ बैठकों में कम से कम ४३ प्रस्तावों के तहत ७,६३३ पेड़ों को हटाने की अनुमति दी। इनमें ३,५०२ पेड़ों की स्थायी कटाई और ४,१३१ पेड़ों के प्रत्यारोपण को मंजूरी दी गई थी। इन प्रस्तावों में मुंबई कोस्टल रोड के दूसरे चरण, धारावी पुनर्विकास, मोतीलाल नगर पुनर्विकास और ऑरेंज गेट, मरीन ड्राइव सुरंग जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। परियोजना क्षेत्रों में कुल १४,८७७ पेड़ों की पहचान की गई थी; शेष पेड़ों को सुरक्षित रखने का प्रस्ताव था। ध्यान रहे, ७,६३३ का आंकड़ा मंजूरियों का है।
पूरी मुंबई का हिसाब
अब तक स्पष्ट क्यों नहीं?
यह केवल आंकड़ों की कमी का मामला नहीं, बल्कि निगरानी और जवाबदेही का भी प्रश्न है। फरवरी २०२६ में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मनपा के हलफनामे को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्यारोपित पेड़ों की संख्या और उनके जीवित रहने की दर का विस्तृत डेटा मांगा था। इससे स्पष्ट होता है कि परियोजनाओं के बाद पेड़ों की स्थिति का पूरा और तुलनीय रिकॉर्ड अदालत के समक्ष भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ था।
२०१८ से २०२३ के बीच मनपा के आंकड़ों में २१,९१६ पेड़ों के प्रत्यारोपण का उल्लेख; नौ वार्डों में उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक ४,३३८ में से सिर्फ ९६३ जीवित मिले। २०२६ में पांच महीने के भीतर ७,६३३ पेड़ों को हटाने की मंजूरी, लेकिन पूरे शहर में पेड़ों के जीवित रहने का अद्यतन और संपूर्ण हिसाब अब भी बड़ा सवाल।

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