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भायंदर की सरकारी जमीनों पर ‘मौत’ का कारोबार!

-हाथभट्टी माफियाओं का खतरनाक नेटवर्क
-आबकारी विभाग और गैस एजेंसियां कटघरे में
सुरेश गोलानी / भायंदर
मीरा-भायंदर शहर के तटीय इलाकों, सरकारी जमीनों और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील मैंग्रोव्ज (खारे पानी के वनों) क्षेत्रों में अवैध देसी शराब की हाथभट्ठियों का एक बेहद खतरनाक और जानलेवा नेटवर्क सक्रिय है। दुर्गम खाड़ियों और घने जंगलों की आड़ में चल रहा यह अवैध देसी शराब का काला कारोबार न केवल पर्यावरण को तबाह कर रहा है, बल्कि स्थानीय नागरिकों, विशेषकर गरीब मजदूर वर्ग के जीवन के लिए भी सीधा ‘मौत का पैगाम’ साबित हो रहा है। हाल ही में उत्तन स्थित सरकारी जमीन पर तड़ीपार गुंडे द्वारा चलाई जा रही भट्ठी में हुए सिलेंडर ब्लास्ट के कारण एक मजदूर की दर्दनाक मौत और उसके बाद लाश को गायब करने की खौफनाक साजिश ने इस क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के दुस्साहस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, इन भट्ठियों में शराब में नशा बढ़ाने के लिए बेहद खतरनाक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। घटिया और सड़े हुए गुड़ के साथ भारी मात्रा में नौसादर, यूरिया और अन्य घातक रसायनों को मिलाकर जहरीला कॉकटेल तैयार किया जाता है। गंदे नालों के दूषित पानी में तैयार होने वाला यह रसायन का जानलेवा मिश्रण सीधे तौर पर इंसानी शरीर के लिए धीमा जहर है। इस जहरीली हाथभट्ठी की शराब का सबसे बड़ा शिकार स्थानीय गरीब तबका, दिहाड़ी मजदूर, ऑटो चालक और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग बनते हैं। सस्ती होने के कारण मजदूर वर्ग इसे चाव से पीता है, लेकिन परिणामस्वरूप वे अंधेपन, ऑर्गन फेलियर और मौत का शिकार हो सकते है।
गैस एजेंसी वालों पर भी कसना चाहिए शिकंजा
इस पूरे रैकेट में अब स्थानीय गैस एजेंसियों की भूमिका भी संदेहास्पद हो गई है। बिना किसी वैध दस्तावेज, कमर्शियल पते या केवाईसी के इन शराब माफियाओं तक इतनी बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है। ब्लैक मार्केट में सिलेंडरों की अवैध सप्लाई करने वाली गैस एजेंसियों और उनके डीलरों पर सख्त शिकंजा कसना बेहद जरूरी है।
आबकारी विभाग कटघरे में
विभाग की नाक के नीचे सालों से धधक रही इन भट्टियों पर कभी कोई ठोस या स्थायी कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस द्वारा समय-समय पर की जाने वाली छापेमारी के महज कुछ ही दिनों बाद ये भट्ठियां उसी स्थान पर दोबारा दोगुनी ताकत से शुरू हो जाती हैं। कानून के रखवालों की यह संदेहास्पद चुप्पी और ढुलमुल रवैया सीधे तौर पर आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों और शराब माफियाओं के बीच गहरी सांठगांठ की ओर इशारा करता है। यदि पर्यावरण और मानव जीवन को निगलने वाले इस अवैध तंत्र, सिलेंडरों की सप्लाई करने वाली एजेंसियों और उसके पीछे बैठे भ्रष्ट अधिकारियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में उत्तन जैसी किसी बड़ी और भीषण जनहानि वाली त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।
चकमा देने का नया पैंतरा: लकड़ियों की जगह गैस सिलेंडरों का अवैध खेल
पहले इन अवैध भट्ठियों को चलाने के लिए भारी मात्रा में सूखी लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन लकड़ियों के जलने से निकलने वाले घने धुएं के कारण पुलिस और आबकारी विभाग को दूर से ही भट्ठी के स्थान का पता चल जाता था। अब पुलिस की आंखों में धूल झोंकने और धुएं से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए माफियाओं ने नया तरीका ढूंढ निकाला है। अब इन भट्ठियों में अवैध रूप से घरेलू गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। धुंआ न होने के कारण यह धंधा मैंग्रोव्ज के बीच गुपचुप तरीके से चलता रहता है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यही गैस सिलेंडर अब ‘टाइम बम’ बन चुके हैं, जिसका नतीजा हाल ही में उत्तन में हुए ब्लास्ट और मजदूर की मौत के रूप में सामने आया है।

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