– क्लस्टर पुनर्विकास के नाम पर जनता को झांसा
– महानगर में वादों के खोखले महल
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भले ही अगले १५-२० वर्षों में मुंबई महानगर क्षेत्र में ३० लाख नए घर बनाने और ठाणे में शहर के भीतर शहर बसाने के बड़े-बड़े दावे किए हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन चमकदार विज्ञापनों से कोसों दूर और बेहद डरावनी है। एक तरफ सरकार क्लस्टर पुनर्विकास और आधुनिक टाउनशिप के नाम पर जनता को सुनहरे सपने बेच रही है, तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि मौजूदा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही बरती जा रही है, कामगारों और आम जनता की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
झूठे वादों की चमक और धरातल पर जानलेवा लापरवाही
सिद्धेश्वर नगर-रामाबाई नगर क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना के शिलान्यास समारोह में शिंदे ने चौड़ी सड़कों, डिजिटल पुस्तकालयों और अत्याधुनिक सुविधाओं के ढिंढोरे पीटे, लेकिन वे यह बताने में नाकाम रहे कि आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। हाल ही में ठाणे के काशीमीरा नाका ओवरब्रिज के पास मेट्रो निर्माण स्थल पर जो हुआ, उसने सरकार के इन दावों की पोल खोल दी है। वहां निर्माण कार्य के दौरान पुल की संरचना से एक भारी लकड़ी का तख्ता सीधे नीचे से गुजर रहे एक २३ वर्षीय युवक के सिर पर आ गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जांच में सामने आया कि न तो वहां कोई सुरक्षात्मक जाली थी, न ही बैरिकेड्स और चेतावनी के कोई इंतजाम थे। लावारिस छोड़ी गई निर्माण सामग्री सीधे लोगों की जिंदगी पर आफत बन कर बरस रही है। खोखले दावे और अधूरी व्यवस्थाएं नजर आती हैं।
सुरक्षा को ताक पर रखकर सिर्फ कागजी योजनाएं
सरकार वॉक टू वर्क और आधुनिक सुविधाओं के नाम पर बड़े-बड़े भाषण दे रही है, लेकिन जिस ठाणे में खतरनाक और जर्जर इमारतों के गिरने से पहले ही कई हादसे हो चुके हैं, वहां निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। हादसों के बाद सिर्फ खानापूर्ति के लिए छोटे स्तर के कर्मचारियों (जैसे ठेकेदार के स्टोरकीपर) पर मामले दर्ज कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि मुख्य योजनाकारों और लापरवाह ठेकेदारों पर कोई ठोस नकेल नहीं कसी जा रही है।
