-जनता की शिकायतें पहुंचीं मुख्यमंत्री कार्यालय, जवाब और कार्रवाई का पता गायब
-मुंबई की पब्लिक बोली, `फडणवीस सरकार को जनता की फिक्र ही नहीं’
सुनील ओसवाल / मुंबई
‘डिजिटल क्रांति’ और ‘ई-गवर्नेंस’ के बड़े-बड़े दावे करने वाली महाराष्ट्र सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य में बारिश की कमी और दुष्काल जैसी परिस्थितियों को लेकर नागरिकों की चिंताएं बढ़ रही हैं, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेजी जा रहीं विभिन्न शिकायतों और मांगों के जवाब को लेकर नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को ई-मेल के जरिए भेजी गई शिकायत या मांग पर कम से कम इतना जवाब जरूर मिलता था कि संबंधित मामला किस विभाग या कार्यालय को भेजा गया है। इससे शिकायतकर्ता को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करने का रास्ता मिल जाता था। अब कई मामलों में ऐसा जवाब नहीं मिलने से शिकायतकर्ता के सामने यह सवाल खड़ा हो रहा है कि उसकी शिकायत आखिर पहुंची कहां और कार्रवाई किसके पास लंबित है?
महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक शिकायत निवारण व्यवस्था खुद कहती है कि शिकायत दर्ज होने के बाद नागरिक को ट्रैकिंग नंबर दिया जाता है और उसी के माध्यम से शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है। सक्षम प्राधिकारी से २१ दिनों में शिकायत के निवारण का प्रयास करने की बात भी सरकारी पोर्टल पर दर्ज है। ऐसे में सीएमओ को सीधे भेजी जाने वाली शिकायतों के संबंध में प्राप्ति, संबंधित विभाग को हस्तांतरण और आगे की कार्रवाई की जानकारी नागरिकों को किस व्यवस्था के तहत मिलेगी, यह स्पष्ट होना जरूरी है।
शिकायतें ऑनलाइन, कार्रवाई ऑफलाइन भी नहीं
खासकर ऐसे समय में, जब राज्य के कई हिस्सों में पानी और बारिश से जुड़े सवाल गंभीर बने हुए हैं, आम नागरिक अपनी समस्या लेकर सरकार तक पहुंचना चाहता है। लेकिन यदि शिकायत भेजने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी ही न मिले तो डिजिटल प्रशासन के दावों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री कार्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले कुछ महीनों में उसे प्राप्त ई-मेल शिकायतों में कितनों को जवाब दिया गया, कितनी शिकायतें संबंधित विभागों को भेजी गर्इं और कितने मामलों में शिकायतकर्ताओं को इसकी सूचना दी गई। जनता सरकार से जवाब मांग रही है, शिकायत भेजने के बाद उसका पता लगाने के लिए नागरिक ही दर-दर भटकेगा या मुख्यमंत्री कार्यालय भी अपनी जवाबदेही निभाएगा?
