-पत्नी, दो पुरोहित और बेटे की हत्या
-बच्चों को सात घंटे बंधक बनाने वाला पिता पुलिस मुठभेड़ में ढेर
सुधीर मिश्रा / आजमगढ़
अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में भाई की आत्मा की शांति और परिवार की परेशानियां दूर करने के लिए कराया जा रहा पांच दिवसीय महामृत्युंजय अनुष्ठान चौथे दिन खूनी नरसंहार में बदल गया। मंगलवार शाम अरविंद सिंह ने विवाद के बाद पत्नी बबीता सिंह तथा पूजा करा रहे पुरोहित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने पुरोहितों से उनका परिचय और आधार कार्ड मांगा था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और अरविंद ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया और उन्हें मारने की धमकी देने लगा। करीब सात घंटे तक पुलिस और परिवार के लोग उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाते रहे। कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आने पर पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल कर दरवाजा तोड़ा। पुलिस का कहना है कि अरविंद ने टीम पर चार-पांच गोलियां चलार्इं। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया।
मां की आंखों के सामने उजड़ा परिवार
अरविंद की मां ने बताया कि बड़े बेटे की हत्या के बाद से अरविंद मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था और घर से कम निकलता था। परिवार को लगा कि महामृत्युंजय अनुष्ठान से उसकी स्थिति सुधरेगी। मां के मुताबिक अरविंद ने पुरोहितों से कहा, `पहचान बताओ, आधार कार्ड दिखाओ; वैâसे मान लें कि तुम पंडित हो? विवाद बढ़ने पर उसने पुरोहितों पर हमला किया। पत्नी बबीता बचाने आई तो उसे भी गोली मार दी। मां ने भागकर डायल-११२ को सूचना दी।
सात घंटे चला ‘बंधक संकट’
-शाम करीब छह बजे पत्नी और दोनों पुरोहितों पर गोलीबारी
– तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हुआ आरोपी
– पुलिस और रिश्तेदारों की अपील भी बेअसर
– कमरे से गोली चलते ही बचाव अभियान शुरू
– दरवाजा तोड़ने पर पुलिस टीम पर फायरिंग
– जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल, अस्पताल में मौत
– बेटे शौर्य की भी मौत; दोनों बच्चियां सुरक्षित बचाई गई
