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‘चिंतन’ के बाद दादा का निकला ‘दम’ … तीन बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी!

चुनाव पूर्व विदर्भ में अजीत पवार गुट में मची भगदड़
सामना संवाददाता / मुंबई
चार दिन पहले अजीत पवार गुट का चिंतन शिविर नागपुर में आयोजित हुआ था। इस शिविर में विदर्भ पर विशेष ध्यान देने की घोषणा की गई थी। अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने और उन्हें साथ मिलाने का सलाहनुमा आदेश भी पार्टी की ओर से सभी नेताओं और मंत्रियों को अजीत दादा ने दिया था। लेकिन अब स्थिति ऐसी बन गई है कि पार्टी के पुराने लोगों को ही थामने की नौबत आ गई है। पार्टी में आए लोग पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं। मंगलवार को नागपुर ग्रामीण के जिलाध्यक्ष बाबा गुजर ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनके दो समर्थकों ने भी इस्तीफा दिया। अब एक दिन बाद ही इसमें यवतमाल जिलाध्यक्ष का नाम भी जुड़ गया है।
यवतमाल जिला परिषद में अजीत पवार गुट अन्य दल के साथ मिलकर सत्ता स्थापित की थी। दादा गुट की ओर से बालासाहेब पाटील उपाध्यक्ष थे। वे सेलू सर्कल से चुने गए थे। जब अजीत दादा ने महायुति में शामिल होने का निर्णय लिया, तब पाटील भी उनके साथ राष्ट्रवादी में चले गए। उन्हें जिलाध्यक्ष पद सौंपा गया था। लेकिन अब अचानक बालासाहेब पाटील ने इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि दादा गुट के नेता केवल अपने और अपने परिवार का ही विचार कर रहे हैं, इस कारण दादा गुट की दूसरी पंक्ति के कार्यकर्ताओं में बड़ी नाराजगी है। कई नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। प्रदेश सचिव रहे देव आनंद पवार ने इस गुटबाजी से ऊबकर भाजपा में प्रवेश कर लिया। ऐसे तमाम नाम हैं, जो दादा गुट में काफी नाराज हैं। वरिष्ठों की ओर से उन्हें दबाए जाने और पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिए जाने से उनके भीतर भारी नाराजगी का माहौल है।

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