दिल्ली के लाल किले के पास १० नवंबर को हुए विस्फोट की जांच कर रही पुलिस फरीदाबाद के धौज में मौजूद अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास एक संदिग्ध निर्माणाधीन मदरसे तक पहुंची है। मदरसे की बिल्डिंग अपनी असामान्य और चिंताजनक संरचना की वजह से सुरक्षा एजेंसियों के शक के घेरे में आई है। शनिवार को पुलिस की एक टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और इमारत की बनावट को देखते हुए इसकी गहन जांच शुरू कर दी है।
इस मदरसे का ढांचा और स्थान कई मायनों में आमतौर से बने मदरसों से बिल्कुल अलग और संदेहास्पद बताया जा रहा है। इसका स्थान भी शक को बढ़ावा दे रहा है, यह मदरसा मुख्य सड़क से करीब एक किलोमीटर अंदर, खेतों के बीच बना हुआ है। इमारत का अधिकांश हिस्सा जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बना हुआ है, जिसका केवल तीन फीट का हिस्सा ही ऊपर दिखाई देता है।
इस मदरसे की दीवारें चार से पांच फीट मोटी बताई जा रही हैं, जबकि एक सामान्य इमारत या शैक्षणिक इमारत की दीवारें सिर्फ ९ इंच मोटी होती हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि किसी शिक्षण संस्थान के लिए इतनी भारी संरचना अस्वाभाविक है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच की जा रही है और इसका संबंध दिल्ली विस्फोट मामले में गिरफ्तार आरोपी से जुड़ा तो नहीं है, इस बात की भी जांच की जा रही है।
जांच में पता चला है कि इस मदरसे के निर्माण की देखरेख करने वाला व्यक्ति मुजम्मिल है, जिसे एनआईए ने गिरफ्तार किया है और जिसके कमरे से २,९०० किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ था। वहीं इस इमारत का रजिस्ट्रेशन मौलवी इश्तेयाक के नाम पर है, जिसने आरोपी मुजम्मिल को किराए पर कमरा दिया था। पुलिस ने उससे भी पूछताछ की है।
फिलहाल, जांच एजेंसियां भवन के कागजात की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मदरसे के निर्माण की फंडिंग आतंकी संगठनों द्वारा की गई थी। साथ ही, इस अजीबोगरीब अंडरग्राउंड ढांचे के पीछे का वास्तविक मकसद क्या था और क्या यहां कोई आतंकी गतिविधि या विस्फोटक जमा करने की योजना थी।
