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दादा के पूत का आया एक और घोटाला … संस्था के नाम पर लेकर पार्थ ने बेच दिया भूखंड!

सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे जमीन घोटाले में फंसे उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि चुनावी दौर में उनका दूसरा जमीन घोटाला सामने आ गया। पुणे में १९३६ में स्थापित ऐतिहासिक संस्था डेक्कन शुगर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन की करोड़ों की जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह जमीन पहले लीज पर ली गई और फिर बेच दी गई। इससे सैकड़ों करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला हुआ है। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है।
राज्य में मनपा चुनावों के चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। इस बीच पुणे में एक और भूखंड घोटाला सामने आया है। यह भूखंड घोटाला भी दादा परिवार के साथ ही जुड़ा हुआ है। आरटीआई से इस बात की पोल खुली है। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने प्राप्त जानकारी के आधार पर यह सनसनीखेज आरोप दादा और उनके बेटे पर लगाया है। कुंभार का कहना है कि जिस जमीन को केवल ६० साल की लीज पर देने की अनुमति धर्मादाय आयुक्त ने दी थी, उसे कथित तौर पर विकसित कर बेच दिया गया। इस जमीन पर दादा गुट का कार्यालय था। इस आरोप के बाद एक बार फिर से उप मुख्यमंत्री अजीत पवार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गए हैं।
लीज की मिली थी अनुमति
कुछ दिन पहले ही वे पुणे में एक संस्था की जमीन कौड़ियों के दाम पर खरीदने के मामले में फंसे हैं। अभी उससे निकल भी नहीं पाए कि इस दूसरे मामले में उलझते नजर आ रहे हैं। कुंभार ने सवाल उठाया कि धर्मादाय आयुक्त ने संस्था को जमीन लीज पर देने की अनुमति दी थी, बेचने की नहीं। संस्था के ट्रस्टियों ने नियमों का उल्लंघन कर जमीन बेच दी। जमीन विकास के लिए साहिल प्रधान को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई। साहिल प्रधान वही व्यक्ति है, जो मुंढवा जमीन घोटाले में अमेडिया कंपनी और शीतल तेजवानी के बीच हुए करार का गवाह रहा है।
आरोपों के घेरे में भाजपा
विजय कुंभार का दावा है कि इस पूरे मामले में उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार की भूमिका सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि जमीन का विकास कल्पवृक्ष प्लांटेशन कंपनी द्वारा किया गया था। जमीन को ६० साल की लीज पर देने की अनुमति थी। हकीकत में जमीन पर निर्माण करके उसकी बिक्री की गई। २०१७ से इस जमीन को विकसित किया गया। विजय कुंभार ने सीधे तौर पर भाजपा पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि भाजपा इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है, क्योंकि वह सत्ता में दादा गुट के साथ साझेदार है।

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