मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : चुनावी चकल्लस

अवधी व्यंग्य : चुनावी चकल्लस

एड. राजीव मिश्र मुंबई

जब से चुनाव के घोषणा भई है चारो ओर मानो धूम मची है। जे अपनी जिनगी मा पाँच दर्जा नही पढ़ि पाए उहौ चुनाव के अनुमान लगाय रहें हैं। जे गाँव के परधानी मा कबहुँ जीत नही पाए उहौ सरकार के सुबह-शाम कुर्सी के पाया तोड़ि रहें हैं। चुनाव के ऑफिस मा बियाह-शादी के माहौल बना है, सुबह-सुबह चाय, ओहिके बाद समोसा अउर जलेबी, दुपहरिया में लिट्टी-चोखा के बाद रात के खाना। कुछ लोग सुबह कुरता-पैजामा साटि के रात एक बजे घर लउटत हैं, जे जेतना बिजी उ उतना बड़हर नेता। जे चुनाव लड़त हय ओहिका तो पुछबय न करो, उ चकाचक कुरतापैजामा अउर सदरी सटाय के निकरत हैं परचार मा कि समझो यहि चुनाव के मौसम मा उ मनई नही देवता हुइ गए हैं। यहि समय नेता अउर उनके चेला-चपाड़ी दूनौ विनम्रता के मूरत होइ गए हैं। नेता वोटर के सामने हाथ जोरि के ठाढ़ि है तो चेला वोटर के पैरन में लोटि जात अहइ, दद्दा यहि बार भइया के हाथ मजबूत करा, तोहार सारा कष्ट दूरि होइ जाइ। वोटर मनय-मन मुस्कियाय रहा है अउर सोचि रहा है कि एक बार जीति गए तो दुबारा कब देखाय परिहय। नेताजी सुबह-सुबह नहाय के बड़का चंदन लगाय के चार-पाँच चेलन के साथ परचार करय निकरे, आगे आगे नेताजी पीछे चारिउ चेला, एक दुइ तीन चार…भइया जी की जय-जयकार, काहें पड़े हैं चक्कर में…कउनउ नही बा टक्कर में, भइया जी संघर्ष करो…हम सब तोहरे साथ हैं, के घनघोर नारा से पूरा गाँव हिलि गवा। नेताजी एक-एक घर के सामने मत्था टेकत आगे बढ़ि रहें हैं अउर जइसनय लौटन के घर के सामने पहुँचे, चेला जोर से नारा लगाइन, भइया जी संघर्ष करो…हम सब तोहरे साथ हैं। नारा के आवाज सुनतै लौटन के कुक्कुर नेताजी के पोंगरा धइ लिहिस अउर देखतय देखत चार दाँत नेताजी के पाँव मा बूड़ि गे। दुइ मिनट के संघर्ष के बाद नेताजी के पूरा कुरता-पैजामा लौटन के कुकुर निकियाय के धय दिहिस अउर उ चारिउ चेला गाँव के बाहर नारा लगाय रहें हैं भइया जी संघर्ष करो…हम सब तोहरे साथ हैं।

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