प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही
बिहार में चुनाव के माहौल अबकी बार कुछ अइसन बा जइसे बरसात में मेंढक टर्र-टर्र करत बाडे। कवनो के भरोसा नइखे कि पानी कब रुक जाई, बाकि आवाज सबके बराबर ऊँची बा। अब देखी ना, अभी त आखिरी चरण के वोट पड़ल भी नइखे, बाकि हर नेता के दिल में जीत के झंडा लहरात बा। कोई कहत बा हमरे लहर बा, त कोई बोलत बा हमरे तेवर बा। जनता बुझा गइल बा कि ई लहर बा कि बुखार बा। नेता जी अबहीं खुश बानी कि ओकरा सरकार बन गईल। बाकि जनता मन में सोचत बा कि बाबू, वोट गिनले बिना रिजल्ट बतावत बानी, त ई लोकतंत्र में नहीं, भविष्यवाणी में लिहल जाई।
हर गली-मोहल्ला में पोस्टर लटकावल बा, नारा लगावल बा, ‘बिहार बदलेगा हमरे साथ’, बाकि जनता कहत बा, पिछली बेरो अइसहीं कहल गइल रहे, अब त रस्ता से लेकर राशन तक बदले नइखे। अबकी बेर जनता चुप बा, बाकि अंदर-अंदर सोच रहल बा कि ई सब बोले के रोग नेता जी के छु रहल बा।
टेलीविजन पर देखीं, एक चैनल कहत बा फलां पार्टी १८० सीट पावत बा, दोसरा कहत बा ना ना, ऊ त हार रहल बा। अब जनता कहे, टीवी वाला लोगन के भी अब जादू-टोना सिख गइल बा। नेता जी सभे मंच पर जा के ऐसें बोलत बानीं जइसे चुनाव आयोग ना, ऊ खुद भगवान बा, हम जीतब, बाकी सब हारब, जनता के अब बुझा गइल बा कि ई सब मंच ना, रंगमंच बा। फर्क बस इतना बा कि टिकट जनता के हाथ में बा, बाकि स्क्रिप्ट नेता जी पहले से लिख लिहले बानी।
बिहार के जनता बड़ा सयानी बा, ऊ जानत बा कि एतना विकास के वादा चुनाव के बाद विलास में बदल जाई। अब ऊ कहे लागल बानी, भइया, नेता के भरोसा पर सरकार ना बनेला, वोट से बनल सरकार भी नेता लोग के भरोसे टिकेला। कुछ लोग कहत बानी त्रिशंकु सरकार बनेगी। जनता कहत बा, बने दीं, त्रिशंकु तो रामायण में भी लटकत रहल, सरकारो थोड़ दिन लटकी त का बिगड़ी? अबकी बिहार चुनाव में जनता ना हँसे के मूड में बा, ना रोए के। ऊ त बस तमाशा देखत बा टीवी पर बयान, रोड शो में नाच, हेलीकॉप्टर के धूल, अउर नेता जी के जोश। बाकि जब बटन दबाई, तबे सबके जोश उतर जाई।
