मुख्यपृष्ठस्तंभभोजपुरिया व्यंग्य :  लगन-बारात मौसम में गरमी के नखरा बढ़ गईल

भोजपुरिया व्यंग्य :  लगन-बारात मौसम में गरमी के नखरा बढ़ गईल

प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही

गांव देहात में लगन-बारात के मौसम शुरू होखे वाला बा… त गरमी के मिजाज अब बदलई लागल बा। लागता सूरज देवता अब छुट्टी पर ना जा के ओवरटाइम कर रहल बाड़े। भोर में जइसे ही आंख खुलल, खिड़की से लू के झोंका अइसन अंदर घुस जाला जइसे बिना बुलावल मेहमान, ना नमस्ते, ना सलाम, सीधा चिपक जाला। गांव के हालत त अउरी मजेदार बा। कुआं में पानी एतना नीचे चल गइल बा कि रस्सी डालते-डालते आदमी खुदे सोच में पड़ जाला, पानी निकाले आयिल बानी कि खुदे नीचे उतर जार्इं। नल त अइसन रूठ गइल बा जइसे ससुराल में नईकी बहुरिया। दिन भर घुमा-फिरा के देख लीं, एक बूंद ना टपके। गरमी के मारा आदमी के हालत अइसन हो गइल बा कि पंखा के सामने बैठ के पसीना पोंछत-पोंछत कहेला हे भगवान, एही जिनगी रह गइल बा का। बिजली भी अइसन खेल खेलतिया कि कब आई, कब जाई, किसी के बाप के भी पता ना। इन्वर्टर भी अब हाथ जोड़ के कहता भाई, हमसे ना हो पाई। बाजार में देखीं त सब्जीवाला भी गरमी से परेशान। तरबूज वाला चिल्ला-चिल्ला के कहता मीठा बा, ठंडा बा…लेकिन खुदे पसीना में भींजल रहेला। ग्राहक पूछता भाई, ठंडा कहां बा ऊ कहता, फल में बा, हमरे में ना स्कूल के बच्चा लोग के हालत त पूछीं मत। मास्टर साहब पढ़ावत कम, पसीना पोंछत जादा नजर आवत बाड़े। बच्चा लोग मन ही मन प्रार्थना करता, हे भगवान, जल्दी छुट्टी करा द, अउर छुट्टी होतिये सब अइसन भागेला जइसे ओलंपिक के दौड़ होखत होखे। नेता लोग भी पीछे ना बा। हर साल गरमी बढ़तिया, त बयान भी बढ़तिया हम ठंडा पानी के व्यवस्था करब, पेड़ लगवाइब। लेकिन पेड़ लगे से पहिले पोस्टर जरूर लग जाला। छांव अभी सपना ही बा। सबसे मजेदार बात त ई बा कि हर आदमी मौसम विभाग बन गइल बा। कोई कहता, आज ३५ डिग्री बा त कोई कहता ना, ४० हो गइल बा जइसे तापमान ना, बोली लग रहल होखे। गरमी अब मौसम ना, परीक्षा बन गइल बा। जे सह गइल, ऊ पास, जे ना सह पावल, ऊ पंखा, कूलर अउर एसी के शरण में। बाकि सच्चाई ई बा कि अगर हमनी पेड़-पौधा ना बचाइब, पानी के कदर ना करब, त ई मजाक एक दिन हकीकत से भी खतरनाक कहानी बन जाई।

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