मुख्यपृष्ठनए समाचारभुजबल की सीएम को चेतावनी... आरक्षण का जीआर सरकार के लिए समस्या!

भुजबल की सीएम को चेतावनी… आरक्षण का जीआर सरकार के लिए समस्या!

-ओबीसी को नुकसान पहुंचाने वाले जीआर को करो रद्द

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार में आरक्षण को लेकर अब ओबीसी समाज सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर टूट पड़ा है। राज्य सरकार में ही मंत्री छगन भुजबल ने सीएम को चेतवानी दी है और कहा है कि यह जीआर सरकार के लिए समस्या पैदा करने वाला है। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को नुकसान पहुंचाने वाला जीआर पहले रद्द करो, अन्यथा समाज सड़क पर उतरेगा।
प्रेस कॉन्प्रâेंस में छगन भुजबल ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आदर करता हूं। उनका इरादा क्या है, उनका अध्ययन भी कितना है, पता नहीं। जिस तरह से मराठा आरक्षण जीआर की ड्राफ्टिंग की गई है, उस बारे में हमने विशेषज्ञों से बात की है। उनका कहना है कि यह समस्या पैदा करने वाला है। पहले जीआर में यह लिखा था कि मराठा समाज के पात्र व्यक्तियों को कुणबी प्रमाणपत्र दें। बाद में जरांगे ने कहा कि पात्र शब्द हटा दें। अब इसका क्या मतलब निकाला जाए? उन्होंने आगे कहा कि रिश्तेदार और संबंध में फर्क है तो रिश्तेदार का मतलब क्या है? ऐसा सवाल उन्होंने उठाया।
उन्होंने कहा कि कुछ आयोगों ने कहा है कि मराठा समाज को ऐसा प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता। अदालत का भी यह मत है कि मराठा समाज पिछड़ा समाज नहीं है, यह एक आगे बढ़ा हुआ समाज है। मराठा या कुणबी मराठा के तौर पर भी वे इसमें नहीं आ सकते। तीनों आयोगों ने इसे खारिज किया है। १९५५ से यह बात कही गई है। मराठा समाज के कई मुख्यमंत्री हो चुके हैं। कुछ केंद्र में भी पहुंचे, लेकिन उन्होंने यह काम नहीं किया। पिछड़े वर्ग का प्रमाणपत्र झूठे तरीके से लिया जा रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसा कहते हुए छगन भुजबल ने अदालत की टिप्पणी पढ़कर सुनाई।
सीधा आरक्षण नहीं देता
उधर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि मराठा आरक्षण के जीआर से ओबीसी समाज को बिल्कुल भी नुकसान नहीं होगा। जीआर में कहीं भी सामान्य तौर पर ऐसा उल्लेख नहीं है। यह किसी को भी सीधा आरक्षण नहीं देता। बता दें कि मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया था। इसके बाद मराठा समाज के आरक्षण से जुड़ी आठ मांगों में से छह मांगें राज्य सरकार ने मान्य करते हुए उस पर जीआर जारी किया। लेकिन मराठा आरक्षण के जीआर पर मंत्री छगन भुजबल ने कड़ी नाराजगी जताई है।

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