महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। फडणवीस ने कहा कि राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश में अराजकता और भ्रम फैलाना चाहते हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े पैâसले चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से लिए थे। फडणवीस ने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘वोट चोरी नहीं, इनका दिमाग चोरी हो गया है।’
सीईसी और एसआईआर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच फडणवीस का यह बयान भाजपा की ओर से चुनाव आयोग के समर्थन में एक और आक्रामक राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
आयोग की चुप्पी, योगी की दलीलें
चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर उठे सवालों के बीच अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलकर मैदान में उतर गए हैं। लखनऊ में मीडिया से बातचीत में योगी ने कांग्रेस, सपा और राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि एसआईआर पर उनकी ‘हाय-तौबा’ दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव जीत जाए तो उसे अपना पुरुषार्थ बताता है, लेकिन जनता नकार दे तो ईवीएम और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करता है। दिलचस्प यह है कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवादों और आंतरिक आपत्तियों की खबरों के बीच भाजपा के कई बड़े नेता आयोग के बचाव में तर्क दे रहे हैं। किरेन रिजिजू, अनुराग ठाकुर और केशव प्रसाद मौर्य भी विपक्ष के आरोपों पर पलटवार कर चुके हैं।
अब सियासी तस्वीर साफ है कि सवाल आयोग पर हैं, लेकिन जवाब देने के लिए भाजपा के नेता लगातार फ्रंट-फुट पर नजर आ रहे हैं।
आयोग का बचाव, ममता पर वार
चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस, वामदलों और उनके सहयोगियों पर एसआईआर को लेकर भ्रम पैâलाने का आरोप लगाया। शुभेंदु ने कहा कि विधानसभा चुनाव में जनता का जनादेश स्वीकार करने के बजाय विपक्ष मतदाता सूची के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना रहा है। करीब ६० लाख मतदाताओं के ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ मामलों की सुनवाई न्यायिक अधिकारियों ने की थी और लगभग २७ लाख नाम बाद में सूची से हटाए गए। इन मामलों के खिलाफ अपील के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ट्रिब्यूनल गठित किए गए है।
ममता बनर्जी की ओर से हटाए गए नाम बहाल कर दोबारा चुनाव की मांग पर शुभेंदु ने पलटवार करते हुए कहा कि इन नामों को हटाने के लिए भाजपा या चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
हिमंत की हिम्मत, राहुल से माफी की मांग
चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच अब भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री खुलकर आयोग के बचाव में उतर आए हैं। योगी आदित्यनाथ के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से देश से माफी मांगने को कहा है। सरमा का कहना है कि कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले पैâसले ले रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर सहित उसके अंतिम पैâसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए। लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ है। विपक्ष आंतरिक आपत्तियों और प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहा है।
ऐसे में राजनीतिक तस्वीर दिलचस्प है – सवाल चुनाव आयोग से हैं, जबकि जवाब देने के लिए एक के बाद एक भाजपा नेता और मुख्यमंत्री मैदान में उतर रहे हैं।
