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रेलवे का ‘विकास मॉडल’ बेनकाब!

 -मस्जिद बंदर, डॉकयार्ड रोड समेत दादर स्टेशन पर यात्री धूप से बेहाल
-रेल मंत्री के विकास के दावों पर उठे सवाल

संदीप पांडेय / मुंबई

एक तरफ रेल मंत्री बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ मुंबई के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए शेड जैसी बुनियादी सुविधा तक मयस्सर नहीं है। मस्जिद बंदर और डॉकयार्ड रोड समेत दादर स्टेशन पर भी यात्रियों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में चिलचिलाती धूप के नीचे ट्रेन का इंतजार करना और बारिश में भीगने की मजबूरी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रेलवे के विकास के दावों के बीच आम यात्रियों की बुनियादी सुविधाएं कब प्राथमिकता बनेंगी?
बुलेट ट्रेन की चमक, स्टेशनों पर बुनियादी
सुविधाओं का टोटा!
रेल मंत्री आधुनिक रेल सेवाओं और बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं। वंदे भारत जैसी ट्रेनों की खूबियों का प्रचार भी जोर-शोर से किया जाता है। लेकिन मुंबई के मस्जिद बंदर, डॉकयार्ड रोड और दादर जैसे स्टेशनों पर यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त शेड उपलब्ध कराने का सवाल अब भी बना हुआ है। दादर जैसे प्रमुख स्टेशन पर भी यात्रियों को इस समस्या का सामना करना पड़ना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
छोटे-से काम के प्रस्ताव को मंजूरी देने में इतनी देरी क्यों?
प्लेटफॉर्म पर शेड लगाना यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा बुनियादी काम है। इसके बावजूद ऐसे कार्यों के प्रस्ताव, मंजूरी और क्रियान्वयन में देरी क्यों होती है? भीषण गर्मी में यात्रियों को धूप में खड़े रहना पड़ता है, जबकि बारिश के दौरान उन्हें भीगने से बचने के लिए जगह तलाशनी पड़ती है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह परेशानी और भी ज्यादा तकलीफदेह हो जाती है।

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