सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा पहले ही विवाद का विषय बना हुआ है। आधिकारिक चुनावी जानकारी में भी अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की अलग सूची उपलब्ध कराई गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ‘ज्ञान’ का गजब कारनामा बताते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने रविवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और इसका वीडियो जारी किया।
महाराष्ट्र की मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के कई उदाहरण सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि कहीं जीवित लोगों को मृत बताया गया, तो कहीं ऐसे नाम मिले, जिनकी जमीनी स्तर पर पहचान ही नहीं हो सकी। रोहित पवार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों को जिंदा होने के बावजूद मृत अर्थात ‘मुर्दा’ बताया गया है, तो कई जगहों पर मृत लोगों को जिंदा बताया गया है। उन्होंने विशेष रूप से शिरूर विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दोहरे नामों की जानकारी सामने आने के बाद जब इन मतदाताओं की वास्तविकता जांची गई, तो कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति ही नहीं मिले।
एसआईआर के प्रारूप में महाराष्ट्र में करीब २.०७ करोड़ मतदाताओं के नाम आगे नहीं बढ़ाए गए थे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे पंजीकरण जैसे कारण शामिल हैं और प्रभावित मतदाताओं को दावे-आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
