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स्क्रीन का बोझ अब बच्चों की रीढ़ पर!

 -लंबे समय तक बैठना, गलत मुद्रा और कम शारीरिक गतिविधि बढ़ा रहे गर्दन-पीठ की तकलीफ

सामना संवाददाता / मुंबई

बच्चों में पीठ, गर्दन और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं अब सिर्फ भारी स्कूल बैग तक सीमित नहीं रह गई हैं। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने चेताया है कि लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, गलत मुद्रा और घटती शारीरिक गतिविधि बच्चों में मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं को बढ़ा सकती है। भारतीय एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स ने स्कूल जाने वाले बच्चों में ऐसी समस्याओं में करीब ४० प्रतिशत वृद्धि की बात कही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार सिर झुकाकर मोबाइल देखना गर्दन और ऊपरी पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां भी कमजोर पड़ सकती हैं। २०२६ की एक व्यवस्थित समीक्षा में अधिक स्क्रीन-आधारित निष्क्रियता और बच्चों में कमर दर्द के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध पाया गया, हालांकि शोधकर्ताओं ने कारण-परिणाम को लेकर सावधानी बरतने की बात भी कही।
समाधान स्क्रीन पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उसकी आदत सुधारना है। विशेषज्ञ नियमित मूवमेंट ब्रेक, आउटडोर खेल, स्ट्रेचिंग, सही ऊंचाई वाली कुर्सी-टेबल और स्क्रीन को आंखों के स्तर के आसपास रखने की सलाह देते हैं। लगातार या बार-बार होने वाले गर्दन-पीठ के दर्द को नजरअंदाज न कर शुरुआती जांच भी जरूरी मानी गई है। स्क्रीन शिक्षा का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन अगर शरीर की गतिविधि कम होती गई तो डिजिटल सुविधा की कीमत बच्चों की रीढ़ चुका सकती है।
स्क्रीन नहीं, आदत बदलें
बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर करना व्यावहारिक नहीं है। विशेषज्ञ स्क्रीन के दौरान नियमित मूवमेंट ब्रेक, आउटडोर खेल और सही मुद्रा अपनाने की सलाह देते हैं। स्क्रीन आंखों के स्तर के करीब हो और कुर्सी-टेबल की ऊंचाई शरीर के अनुरूप होनी चाहिए।

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