-२०१६ में ज्ञानेश कुमार ने पथानामथिट्टा से चुनाव लड़ने को कहा; चुनाव आयोग पहले से एसआईआर विवाद के घेरे में
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अब एक नया और गंभीर आरोप सामने आया है। केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने दावा किया है कि २०१६ में, जब ज्ञानेश कुमार खुद आईएएस अधिकारी थे, तब उन्होंने थॉमसन को २०१९ का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर पथानामथिट्टा से लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी। थॉमसन के मुताबिक, यह बातचीत दिल्ली की एक हवाई यात्रा के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की चर्चा कर रहे थे और उनसे भाजपा उम्मीदवार बनने की संभावना पर बात की। थॉमसन का दावा है कि उन्होंने प्रस्ताव तत्काल ठुकरा दिया था।
यह आरोप ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग पहले ही एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब १० महीनों में कम से कम १४ मौकों पर आयोग के कुछ कदमों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
आईएएस रहते…
इनमें फॉर्म-६ में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के नियंत्रण के केंद्रीकरण और मतदाता नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग राय प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और आयोग के अंतिम पैâसले सामूहिक तथा कानून के अनुरूप रहे हैं। थॉमसन के दावे पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार सरकारी सेवा में रहते हुए भाजपा के लिए राजनीतिक भर्ती जैसी भूमिका निभा रहे थे। दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े नेताओं ने आरोप को खारिज करते हुए इसके समर्थन में सबूत न होने की बात कही है। खुद ज्ञानेश कुमार ने अब तक इस आरोप पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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एसआईआर और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राहुल के हमले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की बातों को सार्वजनिक मंचों पर ज्यादा बढ़ाना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे समाज में ‘गलत संदेश’ जाएगा। रिजिजू ने तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया देने से भी परहेज किया।
उधर, चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े अंतिम आदेश और कार्यक्रम तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर हुए थे। हालांकि, हाल की रिपोर्टों में मतदाता सूची, फॉर्म-६ और डेटा नियंत्रण से जुड़े कुछ मामलों पर आयोग के भीतर औपचारिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। अब विवाद सिर्फ एसआईआर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और राजनीतिक भरोसे पर भी केंद्रित हो गया है।
