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स्लम बस्तियों से मनपा का सौतेला रवैया! …गोवंडी में टूटी गलियां और गंदे नाले बने नरक का मंजर

सगीर अंसारी / मुंबई

मुंबई का पूर्वी उपनगर गोवंडी आज मनपा की लापरवाही और सौतेले रवैये की वजह से बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। बीते कई वर्षों से नगरसेवक चुनाव नहीं होने के कारण इलाके में कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। ऐसे में मनपा अधिकारी अपनी मनमानी पर उतर आए हैं और आम जनता की समस्याओं को अनदेखा कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो गया है।

टूटी गलियां और गंदगी का साम्राज्य

गोवंडी की गलियों और सड़कों का बुरा हाल है। जगह-जगह सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिनसे आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। वहीं, नाले और गटर महीनों से जाम पड़े हैं। बारिश के दिनों में यह नाले उफन कर घरों और गलियों में गंदा पानी भर देते हैं। लेकिन शिकायतों के बावजूद मनपा के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।

सफाई व्यवस्था ध्वस्त

मनपा द्वारा दत्तक वस्ती संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। नागरिकों का आरोप है कि निर्धारित संख्या के बावजूद बहुत कम सफाई कर्मी तैनात किए जाते हैं। नतीजतन इलाके में न तो ठीक से झाड़ू लगती है और न ही नालों-गटरों की सफाई होती है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं, जिससे मच्छर और बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है।

नागरिकों की नाराजगी

स्थानीय निवासी बताते हैं कि रोज़ाना उन्हें गंदगी और टूटे रास्तों से गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल कागज़ों पर काम दिखाता है, ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। एक स्थानीय बुजुर्ग ने नाराज़गी जताते हुए कहा, “हम गरीब बस्तियों के लोग भी इंसान हैं। लेकिन हमारे इलाकों को देखकर लगता है जैसे हमें मुंबई शहर का हिस्सा ही नहीं माना जाता। गलियां टूटी हैं, नाले गंदगी से पटे हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।”

स्वास्थ्य संकट की आशंका

बढ़ती गंदगी और खुले नालों के कारण इलाके में डेंगू, मलेरिया और टायफॉइड जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग और सफाई विभाग दोनों ही केवल कागज़ी कार्रवाई तक सीमित हैं।

आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और रहिवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द सफाई और सड़कों की मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया, तो वे मनपा मुख्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

गोवंडी की बदहाली ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मुंबई जैसे महानगर में गरीब बस्तियों को क्यों हमेशा अनदेखा किया जाता है। आखिर कब तक नागरिक मनपा अधिकारियों की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का खामियाजा भुगतते रहेंगे?

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