दिवाली की रौशनी के बीच बॉलीवुड पर गहरा साया छा गया। हास्य से भरी चाहे कितनी ही पीढ़ियाँ क्यों न गुज़री हों, असरानी का नाम हर होठों पर मुस्कान बनकर आता था। वही असरानी, जिन्होंने कभी अपने किरदारों से उदासी को भी हँसी में बदल दिया, अब हमेशा के लिए अलविदा कह गए।84 वर्ष की उम्र में, सोमवार 20 अक्टूबर की शाम करीब चार बजे आरोग्य निधि अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार थे और फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे थे। उनके मैनेजर बाबू भाई ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए आँसुओं भरी आवाज़ में कहा — ‘वह चार दिन से अस्पताल में थे, लेकिन हमें उम्मीद थी कि वह जल्द लौट आएंगे।’दिवाली के ही दिन, जब शहर दीपों से चमक रहा था, शांतिनगर के श्मशान में उनकी चिता सिमट चुकी थी। हँसी के बादशाह का शरीर शांत हो गया, पर वह आवाज़ जिसे कभी “शोले” और “चुपके चुपके” में देखकर हम हँसे थे — वह यादों में हमेशा गूंजती रहेगी।
