मुख्यपृष्ठनए समाचारसमृद्धि बनाओ चाहे, शक्तिपीठ बनाओ... पर आदिवासियों को कुछ तो दो!

समृद्धि बनाओ चाहे, शक्तिपीठ बनाओ… पर आदिवासियों को कुछ तो दो!

-सामाजिक न्याय पर अब तक हुए अन्याय को क्या किया जाएगा दूर?

-विधान परिषद में एकनाथ खडसे का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे ने विधान परिषद में आदिवासी और सामाजिक न्याय विभाग से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासी और सामाजिक न्याय विभाग का पैसा अन्य वर्गों की ओर मोड़ दिया जाता है, क्या आपने इसकी शिकायत की? खडसे ने कहा कि आदिवासी सामाजिक न्याय विभाग की स्वतंत्रता और स्वायत्तता समाप्त हो गई है। केवल ११ फीसदी पिछड़े वर्ग और ८ फीसदी आदिवासी विभाग को बजट दिया जाता है, लेकिन वास्तव में उन्हें क्या मिलता है? यह भी उन्होंने पूछा।
आगे उन्होंने कहा कि समृद्धि निकालो, शक्तिपीठ बनाओ, पर आदिवासियों को कुछ तो दो। मानसून सत्र में विधान परिषद सदस्य एकनाथ खडसे ने अनुसूचित आयोग पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले आदिवासी विभाग का अलग बजट होता था, अब उसे सामान्य बजट में मिला दिया गया है। कितने पैसे काटे गए? लाडली बहनों को पैसे ट्रांसफर कर दिए गए। पहले योजना आने पर उसके लिए वित्तीय प्रावधान किया जाता था, लेकिन ६५ साल में आदिवासी विभाग का कोई भी विकास नहीं हुआ। पानी पीने के लिए नाले की तरफ जाना पड़ता है। आपकी योजनाएं कहां गर्इं? समृद्धि निकालो, शक्तिपीठ बनाओ, लेकिन आदिवासियों को कुछ तो दो।
गुजरात पलायन कर गए आदिवासी
खडसे ने यह भी कहा कि आदिवासी आश्रम स्कूलों में जूनियर कॉलेज प्राध्यापकों के प्रस्ताव दो साल से लंबित हैं। इसे क्यों अनुमति नहीं दी जाती? छात्रवृत्तियां आज तक क्यों नहीं मिलीं? क्यों इंतजार करना पड़ता है? उन्होंने यह सवाल उठाया कि उन्हें बर्तन नहीं मिलते। राशन की दुकानें नहीं हैं। हमारे क्षेत्र के आधे से ज्यादा आदिवासी गुजरात में पलायन कर गए हैं। गन्ना काटने वाली आदिवासी महिलाएं यहां मजदूरी करती हैं, लेकिन उनका प्रसव कहीं और होता है। एंबुलेंस तक नहीं है। उन्हें इंसान की तरह जीने की अनुमति दो।
राज्य की कभी नहीं थी इतनी बुरी दशा
खडसे ने कहा कि राज्य पर ९ लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। राज्य इतनी दयनीय दशा में कभी नहीं था। आश्रम स्कूलों की हालत बेहद खराब है। वो भी तो इंसानों के ही बच्चे हैं। कुपोषण, चिकित्सा, बैकवर्ड लिंक सप्लाई, शिक्षा इसके लिए पैसे दो। खडसे ने सवाल किया कि आपने समाज के मन में जहर भर दिया है, क्या आप उसे कम कर पाओगे? आदिवासी के नाम पर टेंडर निकलते हैं, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता। सामाजिक न्याय पर अब तक अन्याय हुआ, क्या वह दूर होगा? क्या अमल होगा? यह सवाल भी खडसे ने उठाया।

अन्य समाचार