– विरार में पटरी पर उतरे लोग
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा एक बार फिर अव्यवस्था और जनविरोध के कारण सुर्खियों में है। सोमवार सुबह विरार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा, जब हजारों लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए। इस विरोध की मुख्य वजह रेलवे प्रशासन की कथित मनमानी और आम यात्रियों पर थोपे जा रहे महंगे एसी लोकल का निर्णय रहा।
विरोध के चलते वेस्टर्न लाइन की रफ्तार थम गई। कई ट्रेनें देरी से चलीं और हजारों यात्री बीच रास्ते में फंस गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस और रेलवे अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। सुबह के पीक आवर में स्थिति तब और बिगड़ गई, जब ८:२८ बजे की विरार–चर्चगेट नॉन-एसी लोकल को बिना किसी पूर्व सूचना के एसी लोकल में बदल दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि महज पांच मिनट बाद, ८:३३ बजे पहले से एक और एसी लोकल निर्धारित थी। यानी कुछ ही मिनटों के अंतराल में दो एसी ट्रेनें चला दी गईं, जिससे आम यात्रियों के लिए सस्ती यात्रा का विकल्प सीमित हो गया।
यात्रियों का आरोप है कि रेलवे सुविधा विस्तार के नाम पर नॉन-एसी ट्रेनों की संख्या लगातार घटाई जा रही है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यही वर्ग रोजाना लोकल ट्रेनों के जरिए शहर की अर्थव्यवस्था को गति देता है, लेकिन अब वही सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
पटरी पर उतरा आक्रोश, थमी रफ्तार
पीक आवर में यात्रियों के ट्रैक पर उतरने से वेस्टर्न लाइन की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। कई स्थानों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बाद में पुलिस और रेलवे अधिकारियों की समझाइश के बाद हालात काबू में आए, लेकिन देरी का असर लंबे समय तक बना रहा।
यात्रियों ने लगाए गंभीर आरोप
– यात्री संजय गुप्ता ने कहा, ‘एक एसी ट्रेन बढ़ाने के नाम पर नॉन-एसी ट्रेन कम कर दी गई। अब लंबा इंतजार करना पड़ता है।’
– रेखा श्रीवास्तव ने कहा, ‘लगातार एसी ट्रेनें आने से नॉन-एसी ट्रेनों में भीड़ बेकाबू हो गई है।’
– अर्चना मोरे ने आरोप लगाया, ‘रेलवे सिर्फ कमाई पर ध्यान दे रहा है, यात्रियों की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है।’ प्रदर्शनकारियों की मांग है कि एसी ट्रेनें बढ़ाई जाएं, लेकिन नॉन-एसी ट्रेनों की कीमत पर नहीं। उनका कहना है कि सस्ती यात्रा का विकल्प छीनना लाखों यात्रियों के साथ अन्याय है।
