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‘हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं!’ …. बारामती में पराजय के बाद भी करुणा मुंडे का आत्मविश्वास बरकरार

सामना संवाददाता / मुंबई
बारामती में सुनेत्रा पवार की जीत को मैं स्वीकार करती हूं। लेकिन मेरे मन में ‘हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं’ जैसी भावना है। चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेना ही मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। नामांकन पत्र वैध घोषित होने के क्षण से ही मैंने खुद को विजयी मान लिया था, क्योंकि मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के प्रयास किए गए थे। लड़ना ही मेरी जीत है। बारामती में हार के बाद भी करुणा मुंडे का आत्मविश्वास के बीच इस तरह का बयान दिया है।
बारामती विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस चुनाव में सुनेत्रा पवार ने जीत हासिल की, लेकिन प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार करुणा मुंडे ने हार स्वीकार करते हुए अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने कहा कि भले ही वे चुनाव हार गई हों, लेकिन चुनाव लड़ने का अवसर मिलना ही उनके लिए असली जीत है। परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने मतदाताओं के पैâसले का सम्मान किया और आगे की राजनीतिक दिशा के संकेत भी दिए। चुनाव प्रक्रिया में आई बाधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नामांकन को अमान्य करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें हुईं, लेकिन इसके बावजूद वे मैदान में उतरीं और लड़ीं। यही उनके लिए संतोष की बात है। उन्होंने कहा कि मतों की संख्या उनके लिए ज्यादा मायने नहीं रखती। उन्हें एक वोट मिलता या लाख वोट मिलते, इससे फर्फ नहीं पड़ता, क्योंकि चुनाव लड़ना ही उनके लिए महत्वपूर्ण था।
सुनेत्रा पवार को सलाह
इसी के साथ उन्होंने विजयी उम्मीदवार सुनेत्रा पवार को सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है इसलिए इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुनेत्रा पवार महिलाओं के लिए प्रभावी काम करेंगी और सरकार को भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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