अरुण कुमार गुप्ता
मध्य प्रदेश की मोहन यादव की सरकार में १,१६० करोड़ रुपए का घोटाला हो गया और ईडी, सीबीआई को खबर तक नहीं। खबर भी क्यों हो ईडी और सीबीआई इस समय शेखर सुमन के पार्टनर के यहां छापेमारी में जो व्यस्त हैं, क्योंकि शेखर सुमन सरकार की पोल खोलनेवाले शो करने लगे थे। अब बात करते हैं मुख्य मुद्दे की। दिसंबर २०२३ में मध्य प्रदेश के नागरिक आपूर्ति मंत्रालय यानी सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने अपने गोदाम में रखे सरप्लस चावल को इथेनॉल बनाने वाले प्लांट को इथेनॉल बनाने के मकसद से टेंडर जारी कर दिया। जो चावल बेचा जाना था वह न्यूट्रिएंट ४५ चावल था, जिसे सरकार गरीबों को मुफ्त में बांटती है। इस चावल पर सरकार का ४,००० रु. प्रति क्विंटल का खर्च आता है। जबकि सरकार ने इथेनॉल प्लांट को २,३२० रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बेच दिया। इसी चावल को इथेनॉल प्लांट की बजाय भ्रष्ट अधिकारियों ने राइस मिलों को २,८०० रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से बेच दिया। अधिकारियों ने इथेनॉल प्लांट से सेटिंग कर बढ़िया चावल को अपने पास रखकर २,१०० प्रति क्विंटल वाला घटिया चावल इथेनॉल प्लांट को बेच दिया और इथेनॉल प्लांट ने कागज पर दिखा दिया कि उन्होंने सप्लाई कॉरपोरेशन से लिए हुए चावल से इथेनॉल बनाया है। इस दौरान चावल की दूसरी फसल तैयार हो गई और सरकार ने किसानों से चावल खरीद कर उन्हें राइस मिलों को बेच दिया जो इस कांड में पहले से शामिल थे। इन राइस मिलों ने यह चावल तो अपने पास रख लिए और २,८०० रु. प्रति क्विंटल खरीदे गए चावल को ओपन मार्वेâट में लगभग दोगुनी कीमत पर बेच दिया। इस पूरे कांड में लगभग ५० लाख क्विंटल चावल कागजों में ही इधर-उधर घूमते रहे। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिंग टीम पुख्ता सबूत, ट्रक की लोकेशन, ट्रक का नंबर और जीपीएस सिस्टम लोकेशन के साथ लगभग १,१६० करोड़ रुपए के इस घोटाले को उजागर किया है, लेकिन ईडी और सीबीआई को न तो राम मंदिर का चढ़ावा चोरी घोटाला दिख रहा है और न ही दिल्ली सरकार में हुए ६५० करोड़ रुपए का मेडिकल घोटाला और न ही गरीबों के चावल पर डाका डालनेवाले दिख रहे हैं। जनता को तो वैसे ही हिंदू-मुसलमान वाली अफीम चटा दी गई है।
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