अरुण कुमार गुप्ता
आज पूरे देश में इथेनॉल की चर्चा हो रही है। चर्चा भी क्यों ना हो, जो पेट्रोल में २० प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है। इस एथेनॉल के कारण लोगों की गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं। माइलेज कम हो रहा है। गाड़ियां बंद पड़ रही हैं। मेंटेनेंस बढ़ रहा है, लेकिन मोदी सरकार को इससे कोई फर्क नहीं है। सरकार को तो लोगों की जेब काटकर अपनी तिजोरी भरनी है। ‘मंत्री पुत्र’ की कंपनियों को बिलेनियर बनाना है। यही नहीं, मोदी सरकार की बेशर्मी देखिए, गत दिनों मोदी सरकार ने बेशर्मी दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एथेनॉल का एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। अगले साल रिजल्ट आ जाएगा। इन झूठों पर वैâसे विश्वास किया जा सकता है। २०२४ में ‘ग्रैंड’ करी ने कहा था कि भारत की सड़कों को अमेरिका की सड़कों से बढ़िया बना दूंगा। सड़कों की क्वॉलिटी के मामले में अमेरिका दुनिया में ११वें और भारत ५१वें नंबर पर है। एक बार ‘ग्रैंड’ करी ने यह भी कहा था कि वह पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को भी बंद करवा देंगे। एक बार ईवी गाड़ियों की सब्सिडी का भी विरोध किया था। यही नहीं, एक बार यूरिया के भंडारण के लिए मानव मूत्र के भंडारण की योजना बनाई थी। पता नहीं, उस योजना का क्या हुआ। ‘ग्रैंड’ करी ने यह भी कहा था कि भारत में चलने वाले वाहनों के हॉर्न पी-पी, पू- पू के बजाय भारत के वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, तबले, बांसुरी, तानपुरे इत्यादि की संगीत बजाने के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। पता नहीं क्या-क्या हवा-हवाई बातें कीं, लेकिन जब इनके बेटों को इथेनॉल में मोटा माल मिलने लगा तो सब कुछ भूलकर इथेनॉल पर ध्यान जमा दिया। बस एथेनॉल बनता रहे, बिकता रहे, चाहे लोगों की गाड़ियां खराब हों, पर्यावरण में जहर घुल जाए। कोई फर्क नहीं पड़ता है। अब आप लोग इस एथेनॉल टेररिज्म को बंद करवाने के लिए खड़े हो जाइए।
‘लवकुश’ का पैतृक संपत्ति पर अधिकार!
खबर है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी में शामिल मंदिर कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से १० लाख रुपए बरामद हुए हैं, जो उसने गोबर में छुपा कर रखे थे। अरे भाई लवकुश मिश्रा कितना गरीब आदमी है, घर में तिजोरी तक नहीं है जो गोबर में पैसे छुपाने पड़े। वैसे देखा जाए तो उसका नाम लवकुश है तो उसका जन्मसिद्ध अधिकार है कि वह पैतृक संपत्ति यानी श्रीराम की संपत्ति उसकी है। लवकुश ने चोरी नहीं की है, बल्कि माल अपना समझ कर रख लिया होगा। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर सरकार ने एक एसआईटी बैठा दी। खैर! एसआईटी के साथ यही होता है, अभी वह बैठी है। जब तक खड़ी होगी, मुद्दा ही बैठ जाएगा। अब हम फेकू की बात कर लेते हैं। फेकू तो आप समझ गए होंगे। वह विदेश में मेलोडी और देश में झालमुड़ी खिला रहे हैं। जमीन खाएंगे, चढ़ावा की चांदी और सोना निकल जाएंगे। आरएसएस की भाषा में कहें तो अयोध्या उज्जैन तो झांकी है, अभी मथुरा- काशी बाकी है।
