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पीएम आवास योजना को पलीता लगा रहे डेवलपर्स … घरों के लाभार्थियों से वसूली जा रही मनमानी कीमत!

नींद से जागी सरकार, कीमतें तय करने के लिए जारी किए दिशानिर्देश

सामना संवाददाता / मुंबई
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत लाभार्थियों को किफायती दामों पर घर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा डेवलपर्स को कई रियायतें दी जाती हैं। इन रियायतों के बावजूद योजना के तहत मिलने वाले घर लाभार्थियों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। यह बात सरकार ने मान ली है। यही कारण है कि डेवलपर्स द्वारा मनमानी कीमत वसूलने पर लगाम लगाने के लिए सरकार की ओर से दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों की कीमत तय करने के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार ही डेवलपर्स को अपने प्रोजेक्ट का प्रस्ताव प्रस्तुत करना बंधनकारक होगा। केंद्र सरकार ने २०२२ तक सभी के लिए आवास के नारे के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी, लेकिन इस योजना के तहत १०० प्रतिशत लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। बता दें कि राज्य में इस योजना का कार्यान्वयन १० अक्टूबर, २०२४ से शुरू हुआ। अब राज्य सरकार ने इस योजना के तहत लाभार्थियों के लिए किफायती घर उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए हैं। इस संबंध में सरकारी निर्णय २२ सितंबर को आवास विभाग द्वारा जारी किया गया। इस सरकारी निर्णय में मकानों की कीमतें निर्धारित करने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। अब डेवलपर्स के लिए इन दिशानिर्देशों के अनुसार ही मकानों की कीमतें निर्धारित करना बंधनकारक होगा। साथ ही इन दिशानिर्देशों के अनुसार ही परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत होगा।

निर्धारित करनी होगी कीमतें
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मकानों की कीमतें निर्धारित करते समय डेवलपर्स को दिशानिर्देशों के अनुसार वार्षिक रेडी रेकनर दर के अनुसार कारपेट एरिया के आधार पर कीमत निर्धारित करनी होगी। कई डेवलपर्स कारपेट एरिया के बजाय निर्मित क्षेत्र के आधार पर कीमतें तय करके और महंगे मकान बेचकर लाभार्थियों को ठगते हैं। इसके अलावा अन्य तरह की भी ठगी डेवलपर्स द्वारा लाभार्थियों के साथ की जाती है, लेकिन अब इस धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी और धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों की सरकार नकेल कसेगी।

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