मुख्यपृष्ठनए समाचारसिंचाई घोटाले से देवेंद्र ने बचाया... ‘भूमि कांड’ से दादा को कौन...

सिंचाई घोटाले से देवेंद्र ने बचाया… ‘भूमि कांड’ से दादा को कौन बचाएगा?

-अंजलि दमानिया ने अजीत पवार पर साधा निशाना

सामना संवाददाता / मुंबई

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने पुणे में पार्थ पवार की जमीन घोटाला मामले में एक अहम कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने लैंड माफिया की ठगी की पद्धति और घोटाले के अलग-अलग चरणों का विस्तार से खुलासा किया। कई नागरिकों से मिले दस्तावेजों का संग्रह उन्होंने बावनकुले को दिखाया और कहा कि यह घोटाला कितनी गहराई तक पैâला है, इसके सबूत कल सामने आएंगे। उन्होंने अजीत पवार को चेताते हुए कहा कि ७० हजार करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले में तो फडणवीस ने तुम्हें बचा लिया, लेकिन देखते हैं इस बार तुम्हें कौन बचाता है!
दमानिया ने स्पष्ट कहा कि सौदा रद्द होने का मतलब यह नहीं कि मामला खत्म हो गया। इस प्रकरण में १,८०४ करोड़ रुपए मूल्य की जमीन सिर्फ ३०० करोड़ में ट्रांसफर की गई, जिसमें स्टांप ड्यूटी की भारी चोरी की गई। ५०० रुपए के स्टांप पेपर पर हुए इस सौदे से १२६ करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी चोरी की गई और अब उसे रद्द करने के लिए २१ करोड़ रुपए का शुल्क देना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कल होने वाली प्रेस कॉन्प्रâेंस में इस पर बड़ा खुलासा होगा, जिसमें यह मुद्दा उठाया जाएगा कि चोरी का माल लौटाने से अपराध माफ नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह नोटिस केवल आर्थिक भरपाई से जुड़ी है, लेकिन आपराधिक जांच अभी भी जरूरी है।
अंजलि दमानिया ने अजीत पवार की प्रेस कॉन्प्रâेंस का जवाब देते हुए कहा कि पिछले १५-१६ सालों से उन पर लगे आरोप सही साबित होने के बावजूद देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें बचाया। उन्होंने सिंचाई घोटाला, महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला और अन्य मामलों में अदालत में अपील करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वैâसे अमेडिया जैसी फर्जी कंपनियां बनाई गर्इं, जिनका ग्रॉस रेवेन्यू शून्य था, फिर भी जमीन सौदे किए गए। इन फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से पार्थ पवार की भूमिका उजागर होगी, और दमानिया हाई कोर्ट में जाकर न्याय की मांग करेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि चाहे मोदी, शाह या फडणवीस किसी के पास भी जाओ, इस मामले से बच नहीं पाओगे।
पुराने दस्तावेजों में घोटाले की जड़
दमानिया ने १९३२ की महार समाज की सनद और उसके बाद सरकार द्वारा दी गई मुआवजे की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि घोटाले की जड़ इन पुराने दस्तावेजों में छिपी है। इस सनद के अनुसार, जिन जमीनों पर पहले ही मुआवजा दिया जा चुका था, वे दोबारा बेचने योग्य नहीं थीं। फिर भी उन्हें अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया।

अन्य समाचार